किसान आंदोलनहिमाचल प्रदेश में किसान और मजदूर संगठन 10 अगस्त यानी आज सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होंगे. हिमाचल किसान सभा (HKS) और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) ने किसानों, खेतिहर मजदूरों और कामगारों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है. संगठनों का आरोप है कि सरकार की नीतियां किसानों और मजदूरों के हितों के बजाय कॉरपोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचा रही हैं. HKS और CITU की ओर से जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी अपील पर हिमाचल प्रदेश में करीब 25 जगहों पर प्रदर्शन किए जाएंगे. ये प्रदर्शन जिला, उपमंडल और ब्लॉक स्तर पर आयोजित होंगे.
संगठनों ने बताया कि 10 अगस्त के आंदोलन में अलग-अलग जगहों पर 'जेल भरो', 'रास्ता रोको', 'रेल रोको' और अन्य लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा. संगठनों ने किसानों और मजदूरों से इन प्रदर्शनों को सफल बनाने की अपील की है. HKS और CITU ने कहा कि 10 अगस्त का आंदोलन केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आगे होने वाले बड़े आंदोलन की तैयारी का हिस्सा है. संगठनों के अनुसार, 26 नवंबर 2026 से देशभर में 'खेती बचाओ, उद्योग बचाओ और भारत बचाओ' के नारे के साथ बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है. उन्होंने कहा कि 26 नवंबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2020 में इसी दिन किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी.
किसान संगठनों ने सभी फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी की मांग उठाई है. उनका कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिलना चाहिए. इसके साथ ही सरकार द्वारा फसलों की पक्की खरीद सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है. संगठनों ने कृषि कर्ज पूरी तरह माफ करने और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग भी रखी है.
किसान और मजदूर संगठनों ने मनरेगा को मजबूत करने की मांग की है. इसके तहत 200 दिन का रोजगार और खेतिहर मजदूरों के लिए 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग की गई है. वहीं मजदूरों के लिए न्यूनतम 42 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग भी उठाई गई है. संगठनों ने चार श्रम कानूनों को वापस लेने, बिजली के निजीकरण को रोकने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर हटाने की मांग की है. इसके अलावा बीज विधेयक, 2025 को लागू नहीं करने की मांग भी रखी गई है.
HKS और CITU ने आरोप लगाया कि खेती, उद्योग, बिजली और सार्वजनिक संसाधनों पर कॉरपोरेट कंपनियों का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है. संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन खेती, रोजगार, सार्वजनिक क्षेत्र, राज्यों के अधिकार और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए है. संगठनों ने केंद्र से राज्यों की हिस्सेदारी विभाज्य कर पूल में 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग भी की है. संयुक्त बयान पर HKS के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, राज्य सचिव राकेश सिंघा, CITU के राज्य अध्यक्ष वजिंदर मेहरा और राज्य सचिव प्रेम गौतम के हस्ताक्षर हैं. (ANI)
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