
आपदा बचाव प्रशिक्षक और तैराकी प्रशिक्षक राजेश की मौतकेरल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य के दौरान अपनी जान न्योछावर करने वाले आपदा बचाव प्रशिक्षक और तैराकी प्रशिक्षक राजेश को राज्य सरकार राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देगी. मुख्यमंत्री वी.डी. सथीशन ने इस बहादुर रेस्क्यू वॉलंटियर के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए उनके अधूरे मकान का निर्माण सरकारी सहायता से पूरा कराने की भी घोषणा की है.
तिरुवनंतपुरम के रहने वाले राजेश कन्नूर जिले के चेरुपुझा इलाके में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए पहुंचे थे. बचाव अभियान के दौरान उन्होंने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. इसी दौरान एक किसान बेन्नी बाढ़ के पानी में फंस गया था. उसे बचाने के प्रयास में राजेश ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजेश ने बेन्नी को बचाने के लिए अपना लाइफ जैकेट तक उसे दे दिया ताकि उसकी जान बचाई जा सके. दोनों लगभग सुरक्षित स्थान तक पहुंचने ही वाले थे कि अचानक नदी में पानी का तेज बहाव आ गया. इस दौरान राजेश का नियंत्रण छूट गया और वह पानी की तेज धारा में बह गए. बाद में उनकी मौत हो गई.
राजेश केवल एक तैराकी प्रशिक्षक ही नहीं थे, बल्कि आपदा बचाव कार्यों में प्रशिक्षित और अनुभवी स्वयंसेवक भी थे. उन्होंने केरल में आई पिछली बाढ़ों और वायनाड आपदा के दौरान भी राहत और बचाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई थी. संकट के समय लोगों की मदद करना उनके जीवन का मिशन बन चुका था.

मुख्यमंत्री वी.डी. सथीशन ने कहा कि राजेश ने किसी दूसरे व्यक्ति की जान बचाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. उनका यह त्याग और मानवता के प्रति प्रेम हमेशा याद रखा जाएगा.
मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा, "राजेश एक समर्पित बचावकर्मी थे, जिन्होंने पहले भी केरल की बाढ़ और वायनाड आपदा के दौरान स्वयंसेवक के रूप में काम किया था. मानवता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा. उनकी बहादुरी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी."
मुख्यमंत्री ने राजेश के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है. उन्होंने घोषणा की कि राजेश को पूर्ण राजकीय सम्मान दिया जाएगा. इसके अलावा, उनका जो मकान अभी निर्माणाधीन है, उसे सरकार पूरा करवाएगी ताकि परिवार को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
राजेश के एक रिश्तेदार ने बताया कि वह बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए स्वेच्छा से वहां पहुंचे थे. उन्होंने दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था. तीसरे व्यक्ति को बचाने के दौरान उन्होंने अपना लाइफ जैकेट तक उसे दे दिया.
रिश्तेदार ने कहा, "राजेश एक विशेषज्ञ प्रशिक्षक थे. वह बेहद अच्छे तैराक थे और कठिन परिस्थितियों में भी तैर सकते थे. लेकिन नदी पार करते समय रस्सी से उनका पकड़ छूट गई और तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहा ले गया. इस बार क्या हुआ, यह समझ पाना मुश्किल है."
राजेश की मौत ने पूरे केरल को भावुक कर दिया है. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों तक, हर जगह उनके साहस और बलिदान की चर्चा हो रही है. लोगों का कहना है कि उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान देकर मानवता की सर्वोच्च मिसाल पेश की है.
राजकीय सम्मान और उनके घर के निर्माण को पूरा कराने का फैसला सरकार की ओर से उनकी वीरता और सेवा भावना को दी गई बड़ी श्रद्धांजलि माना जा रहा है. उनकी कहानी आने वाले समय में भी लोगों को निस्वार्थ सेवा और परोपकार की प्रेरणा देती रहेगी.(शिबी की रिपोर्ट)
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