KCC : केसीसी बना किसानों का ब्रह्मास्त्र , कर्ज़ से मिली मुक्ति, कमाई हुई डबल

KCC : केसीसी बना किसानों का ब्रह्मास्त्र , कर्ज़ से मिली मुक्ति, कमाई हुई डबल

किसान क्रेडिट कार्ड योजना भारतीय किसानों की आर्थिक हालत सुधारने का बड़ा जरिया बनी है। 1998 में शुरू हुई इस योजना ने किसानों को साहूकारों के महंगे कर्ज से आजादी दिलाई है.रिपोर्ट के मुताबिक, केसीसी के तहत खेती में लगे हर 1 रुपये पर 2.30 रुपये की कमाई हो रही है। देश में 7.72 करोड़ से अधिक किसान 10.2 लाख करोड़ रुपये का लाभ उठा रहे हैं। रुपे एटीएम कार्ड से किसान जरूरत के हिसाब से पैसा निकालते हैं और सिर्फ निकाली गई रकम पर ही ब्याज देते हैं.

Advertisement
KCC : केसीसी बना किसानों का ब्रह्मास्त्र , कर्ज़ से मिली मुक्ति, कमाई हुई डबलकेसीसी ने बदली भारतीय खेती की तस्वीर

बेंगलुरु स्थित 'इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज' द्वारा किए गए एक तीसरे पक्ष के मूल्यांकन आधार पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा बताए गए बेहद शानदार नतीजे सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड –संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत खेती में निवेश किए गए हर 1 रुपये से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के शुद्ध मूल्यवर्धन में 2.30 रुपये का योगदान मिलता है. इसका सीधा मतलब यह है कि किसान केसीसी से मिलने वाले पैसे का सही इस्तेमाल करके अपनी आय को दोगुने से भी अधिक बढ़ा रहे हैं. इस योजना से फसल सघनता  बढ़ी है और किसान अब साल में एक से अधिक फसलें उगा रहे हैं. केसीसी से मिलने वाली समय पर वर्किंग कैपिटल की बदौलत किसान अच्छी गुणवत्ता के बीज, सही खाद और आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का इस्तेमाल कर पा रहे हैं. समय पर लोन चुकाने पर मिलने वाले प्रोत्साहन ने किसानों में बेहतर वित्तीय अनुशासन पैदा किया है, जिससे बैंकों का भरोसा भी बढ़ा है.

कर्ज़ की टेंशन खत्म, खेती में मुनाफा डबल

किसान क्रेडिट कार्ड योजना भारतीय खेती और किसानों की माली हालत सुधारने का एक बहुत बड़ा जरिया साबित हुई है. इसकी शुरुआत साल 1998 में हुई थी ताकि किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए बैंक से समय पर और आसान लोन मिल सके. इसके बाद 2004 में इसे खेती से जुड़ी दूसरी गतिविधियों जैसे पशुपालन और डेयरी के लिए बढ़ाया गया,और 18 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका संशोधित रूप लॉन्च किया, जिसने किसानों को बैंकिंग प्रणाली से सिंगल विंडो के तहत हर तरह की आर्थिक मदद दी.

आज के आंकड़े बताते हैं कि यह योजना देश के कोने-कोने में पहुंच चुकी है. फिलहाल पूरे देश में 7.72 करोड़ से भी ज्यादा एक्टिव किसान क्रेडिट कार्ड हैं, जिनके जरिए लगभग 10.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज किसानों को मिला हुआ है. इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए देश के 457 बैंकों, जिसमें 37 कमर्शियल बैंक, 46 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और 374 सहकारी बैंक शामिल हैं, को जोड़ा गया है. आज किसान क्रेडिट कार्ड देश के गांव-गांव तक पहुंचकर किसानों का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है.

साहूकारों के चंगुल से आजादी

किसान क्रेडिट कार्ड के आने से पहले किसानों की सबसे बड़ी मजबूरी यह थी कि उन्हें फसल उगाने या घर के रोजमर्रा के खर्चों के लिए गांव के साहूकारों और सूदखोरों के दरवाजे खटखटाने पड़ते थे. साहूकार मनमाना ब्याज वसूलते थे और किसान जिंदगी भर उनके कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाता था. अगर बैंक से भी पारंपरिक लोन लेना पड़ता था, तो एकमुश्त लोन की किश्तें और जटिल कागजी कार्रवाई किसान के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती थी. केसीसी ने इस पूरे सिस्टम को बदल दिया है.

इस योजना के तहत किसानों को रुपे (RuPay) एटीएम कार्ड दिया जाता है, जिससे वे अपनी जरूरत के हिसाब से जब चाहें पैसा निकाल सकते हैं और जब फसल बिके तो आसानी से वापस जमा कर सकते हैं. किसानों को सिर्फ उतने ही पैसे पर ब्याज देना पड़ता है जितना वे निकालते हैं, न कि पूरी मंजूर हुई सीमा पर। इससे किसानों पर बेवजह ब्याज का बोझ नहीं पड़ता और उन्हें साहूकारों के शोषण से हमेशा के लिए निजात मिल गई है.

सस्ता कर्ज और बिना गारंटी लोन

सरकार ने किसानों को राहत देने और खेती की लागत कम करने के लिए ब्याज दरों में भारी छूट दी है. संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत किसानों को 3 लाख रुपये तक का शार्ट टर्म क्रॉप लोन वैसे तो 7% की ब्याज दर पर मिलता है, लेकिन समय पर लोन का भुगतान करने वाले किसानों को 3% की अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है. इस तरह किसान को प्रभावी रूप से केवल 4% की बेहद सस्ती ब्याज दर पर कर्ज मिल जाता है. सरकार ने इस सब्सिडी योजना के तहत अपनी शुरुआत से लेकर साल 2024-25 तक लगभग 1.87 लाख करोड़ रुपये की भारी सब्सिडी राशि खर्च की है.

इसके अलावा, किसानों की मदद के लिए 1 जनवरी 2025 से बिना किसी गारंटी के लोन लेने की सीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है. वहीं, MISS के तहत मिलने वाली फसल व संबद्ध लोन की सीमा को भी बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दिया गया है, ताकि किसानों को बड़े पैमाने पर खेती करने में पैसों की तंगी न हो.

डिजिटल क्रांति से पारदर्शी सिस्टम

अक्सर देखा जाता था कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन केसीसी में तकनीकी पहलों ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है. सरकार ने 'किसान ऋण पोर्टल', 'जन समर्थ पोर्टल', 'ई-केसीसी' और 'कृषिका' जैसी आधुनिक डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं. अब केवल एक पन्ने का बेहद आसान फॉर्म भरकर KCC के लिए आवेदन किया जा सकता है. इसमें पीएम-किसान (PM-KISAN) के रिकॉर्ड से किसान का बुनियादी डेटा अपने आप जुड़ जाता है और किसान को सिर्फ अपनी जमीन के कागज और बोई गई फसल का ब्योरा देना होता है.

इसके फॉर्म  बैंकों की वेबसाइट्स, पीएम-किसान पोर्टल और नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटरों पर आसानी से उपलब्ध होता है. डिजिटल एकीकरण के कारण अब सब्सिडी के दावों का निपटारा और लोन की मंजूरी बहुत तेजी से होती है, जिससे बिचौलियों का रोल खत्म हो गया है और किसानों को सीधे उनके खाते में समय पर पैसा मिल जाता है.

खेती के साथ डेयरी और मछली पालन

किसान क्रेडिट कार्ड अब सिर्फ पारंपरिक फसल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों को नया जीवन दिया है. साल 2018-19 में सरकार ने केसीसी की सुविधा को मत्स्य पालकों और पशुपालकों के लिए भी लागू कर दिया. आंकड़ों के अनुसार, पशुपालन के क्षेत्र में 55.9 लाख आवेदनों में से 55.08 लाख स्वीकार किए गए और 39.22 लाख लोन मंजूर किए गए। इसी तरह मत्स्य पालन में भी 6.83 लाख आवेदनों में से 6.77 लाख स्वीकार किए गए। इससे किसानों की केवल मौसमी खेती पर निर्भरता कम हुई है.

दूध, मुर्गी पालन और मछली पालन से किसानों को पूरे साल नियमित आय मिलती रहती है. विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए केसीसी से मिलने वाली कार्यशील पूंजी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है. केसीसी ने खेती को जोखिम मुक्त और बहु-आयामी बनाकर किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा कर दिया है.


 

POST A COMMENT