पंजाब में किसान ने की खुदकुशी (AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर)पंजाब में दो किसानों ने खुदकुशी कर ली. घटना संगरूर जिले के एक गांव की है. दोनों किसानों ने जहर पीकर आत्महत्या कर ली. यह दर्दनाक वारदात शाहपुर कलां गांव की है जो चीमा के नजदीक है. दोनों किसानों की यह घटना पिछले दो दिन के अंदर की है. बताया जा रहा है कि दोनों किसान लाखों रुपये के कर्ज से दबे थे. इसी कर्ज की टेंशन में दोनों किसानों ने अपनी जान दे दी.
शाहपुर कलां गांव के पूर्व सरपंच बलविंदर सिंह ने बताया कि किसान जगरूप सिंह (35) ने मंगलवार को कोई जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. वह चार एकड़ जमीन का मालिक था और उस पर लाखों रुपये का कर्ज था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया. उन्होंने आगे बताया कि सोमवार को कोई जहरीली चीज खाकर आत्महत्या करने वाले लवप्रीत सिंह (25) भी कर्ज में डूबे युवा किसान थे, जिनके पास सिर्फ डेढ़ एकड़ जमीन थी. कर्ज के कारण दोनों किसान मानसिक तनाव में थे.
एसएचओ चीमा मंजीत सिंह ने बुधवार को दोनों किसानों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों किसानों ने कोई जहर खाकर आत्महत्या की है. उन्होंने बताया कि दोनों किसानों के शवों का पोस्टमार्टम पिछले दिन ही करवा दिया गया था. उन्होंने बताया कि पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 194 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी है. दोनों मृतक किसानों के शवों का बुधवार को गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया.
पंजाब में किसानों की आत्महत्या का मामला गंभीर है और इस तरह की घटनाएं अधिक आती हैं. यहां तक कि खनौरी बॉर्डर पर चलने वाले किसान आंदोलन के दौरान भी किसानों की खुदकुशी के मामले सामने आते हैं. इसके पीछे किसानों की चिंता और उनकी खेती की बढ़ती लागत को वजह के रूप में देखा जाता है. लागत बढ़ने से किसान कर्ज के बोझ तले दबते चले जाते हैं और बाद में इसे चुकता होता न देख हताशा में अपनी जान दे देते हैं.
किसान इस उम्मीद में कर्ज लेकर महंगी खेती करते हैं कि जब उपज आएगी, तो उसका रेट अच्छा मिलेगा जिसे बेचकर वे कर्ज चुका देंगे. लेकिन जब लागत भी नहीं निकलती तो किसानों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है. इस तरह की तमाम खबरें आती हैं कि खाद-बीज और सिंचाई की महंगाई के बीच किसानों ने खेती की. मगर जब कमाने की बारी आई तो दाम इतने गिर गए कि ढुलाई और मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पाया. ऐसे हालात में किसान खुदकुशी जैसे बड़े कदम उठा लेते हैं.
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