सड़कों पर उतरे किसान, ‘कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ’ नारे के साथ किया विरोध प्रदर्शन

सड़कों पर उतरे किसान, ‘कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ’ नारे के साथ किया विरोध प्रदर्शन

‘कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ किसान और ट्रेड यूनियन सड़क पर उतरे. किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़ा मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों ने किसानों, मजदूरों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए अपनी मांगें पूरी करने की मांग की.

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सड़कों पर उतरे किसान, ‘कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ’ नारे के साथ किया विरोध प्रदर्शनकिसानों का विरोध प्रदर्शन

देशभर की ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों की ओर से ‘कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ’ के नारे के तहत पंजाब के संगरूर जिले में संयुक्त किसान मोर्चे के बैनर तले जिला स्तर पर बड़े विरोध प्रदर्शन किए गए. इसी कड़ी में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान और अलग-अलग संगठनों के कार्यकर्ता डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों की ओर मार्च करते हुए पहुंचे. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और सरकारी विभागों के निजीकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का किया विरोध

प्रदर्शन के दौरान संगठनों की ओर से ‘कॉरपोरेट देश छोड़ो’ का नया नारा भी दिया गया. नेताओं ने कहा कि आजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ का नारा बुलंद किया गया था. उसी तर्ज पर अब देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी संसाधनों पर बड़े कॉरपोरेट घरानों के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ ‘कॉरपोरेट देश छोड़ो’ का नारा दिया जा रहा है.

ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी विरोध जताया. किसान संगठनों का कहना है कि इस तरह के व्यापार समझौतों का असर देश के किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों पर पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे किसी भी समझौते से पहले किसानों और मजदूरों के हितों को प्राथमिकता दी जाए.

किसानों ने कहा- ये एक दिन की लड़ाई नहीं

प्रदर्शनकारियों ने सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के निजीकरण का भी विरोध किया. उनका आरोप है कि सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने से आम लोगों को मिलने वाली सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ेगा और रोजगार के अवसर भी सीमित हो सकते हैं. प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने ऐलान किया कि वे डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के गेट पर पहुंचकर गिरफ्तारियां देंगे. किसान नेताओं ने कहा कि यह केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि मजदूरों, किसानों और आम लोगों के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने की शुरुआत है.

संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले समय में देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किए जाएंगे. संगठनों ने कहा कि ‘कॉरपोरेट भगाओ, देश बचाओ’ अभियान को गांवों, कस्बों और शहरों तक ले जाकर व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा.

किसानों का मोगा डीसी दफ्तर के बाहर धरना

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज पूरे पंजाब के साथ-साथ मोगा में भी किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया. किसानों ने 'कॉरपोरेट घराना हटाओ, देश बचाओ' के नारे लगाते हुए मोगा के डीसी दफ्तर के बाहर धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान और मजदूर संगठनों के सदस्य मौजूद रहे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केंद्र सरकार की नीतियां कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली हैं, जिससे किसानों और आम जनता को नुकसान हो रहा है.

उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी नीतियों को तुरंत वापस ले और किसानों के हितों की रक्षा करे. वहीं दूसरी ओर पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी का भी विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस तरह किसानों ने पहले दिल्ली में कृषि कानूनों को वापस करवाया था और जंतर-मंतर पर युवाओं ने एकजुट होकर पेपर लीक मामले में जीत हासिल की थी, उसी तरह इस समझौते को भी रद्द करवाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा.

किसानों के लिए MSP बढ़ाने की मांग

कुछ ऐसा ही मालमा पश्चिम बंगाल के आसनसोल से आया, जहां श्रम कोड रद्द करने और मजदूर-किसानों के अधिकारों समेत कई मांगों को लेकर लेफ्ट पार्टियों ने ‘कानून तोड़ो और जेल भरो’ आंदोलन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई. CPM के पश्चिम बर्धमान जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,150 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की. उन्होंने बड़े कॉरपोरेट के जरिए कृषि उपज की खरीद व्यवस्था का भी विरोध किया. (कुलवीर सिंह, तन्मय सामंत और अनिल गिरी की रिपोर्ट)

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