बीड में सूखा समीक्षा बैठक से गैरहाजिर तहसीलदार पर एक्शन, अफसर ने कहा- राजनीतिक दबाव में हुई कार्रवाई

बीड में सूखा समीक्षा बैठक से गैरहाजिर तहसीलदार पर एक्शन, अफसर ने कहा- राजनीतिक दबाव में हुई कार्रवाई

बीड में सूखा राहत समीक्षा बैठक से गैरहाजिर रहने पर कैज तहसीलदार भारत गंगावणे को पद के प्रभार से हटा दिया गया. कलेक्टर विवेक जॉनसन ने अतिरिक्त प्रभार नायब तहसीलदार अशोक भंडारे को सौंप दिया. गंगावणे ने कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने छुट्टी की पहले से अनुमति ली थी.

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बीड में सूखा समीक्षा बैठक से गैरहाजिर तहसीलदार पर एक्शन, अफसर ने कहा- राजनीतिक दबाव में हुई कार्रवाईसूखा समीक्षा बैठक में गैरहाजिरी पर एक्‍शन (AI Image)

महाराष्ट्र के बीड जिले में सूखा राहत की समीक्षा बैठक से गैरहाजिर रहना कैज तहसीलदार भारत गंगावणे को भारी पड़ गया. जिला कलेक्टर विवेक जॉनसन ने उन्हें कैज तहसीलदार के पद के प्रभार से हटा दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, गंगावणे मंगलवार को स्थानीय विधायक नमिता मुंडाडा की अध्यक्षता में हुई अहम समीक्षा बैठक में मौजूद नहीं थे. हालांकि, कार्रवाई के बाद तहसीलदार ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया है.

नायब तहसीलदार को मिला अतिरिक्त प्रभार

कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से कैज तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार नायब तहसीलदार (रेवेन्यू-2) अशोक भंडारे को सौंप दिया है. वह अगले आदेश तक अपने मौजूदा दायित्वों के साथ कैज तहसीलदार का काम भी संभालेंगे. अफसरों ने कहा क‍ि बीड और आसपास के मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए राजस्व अधिकारियों को मुख्यालय नहीं छोड़ने और अपने क्षेत्र में उपलब्ध रहने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं.

इसी दौरान कैज तहसीलदार भारत गंगावणे की सूखा राहत समीक्षा बैठक में अनुपस्थिति को प्रशासन ने गंभीरता से लिया. बताया गया कि विधायक नमिता मुंडाडा की बैठक में तहसीलदार के नहीं पहुंचने पर विधायक ने जिला प्रशासन के सामने नाराजगी दर्ज कराई थी. इसके बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई.

कलेक्टर के दौरे में भी गैरहाजिरी का दावा

गंगावणे की अनुपस्थिति को लेकर उस समय भी सवाल उठे थे, जब 26 सितंबर को कलेक्टर विवेक जॉनसन सूखा प्रभावित गांवों के दौरे पर पहुंचे थे. कलेक्टर ने उस दौरान तांबवा, सरनी और सांगवी समेत प्रभावित इलाकों का जायजा लिया था और कैज तहसील कार्यालय का भी निरीक्षण किया था. उस दौरे के दौरान भी तहसीलदार मौजूद नहीं थे.

तहसीलदार बोले- पहले ही ली थी छुट्टी की अनुमति

हालांकि, कार्रवाई के बाद भारत गंगावणे ने प्रशासन के आरोपों को खारिज कर दिया. उनका कहना है कि वह बिना अनुमति के अनुपस्थित नहीं थे. उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए औपचारिक अवकाश आवेदन दिया था और जिला कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और एसडीओ से पहले ही अनुमति ले ली थी. गंगावणे ने कहा कि कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका पक्ष पूछा जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी बात सुने बिना एकतरफा निर्णय लिया है.

राजनीतिक दबाव का भी लगाया आरोप

तहसीलदार ने राजनीतिक हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया. उनका कहना है कि पिछले एक साल में उनका चार बार तबादला हो चुका है, लेकिन उन्होंने स्थानीय दबाव के आगे झुकने से इनकार किया. गंगावणे ने कहा कि हाल में कैज तहसील के यूसुफ वडगांव इलाके में अवैध रूप से चल रहे एक जेसीबी और ट्रैक्टर को उन्होंने जब्त किया था.

गंगावणे का आरोप है कि इन वाहनों को छोड़ने के लिए उन पर राजनीतिक दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. उन्होंने दोनों वाहनों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव एसडीओ कार्यालय भेज दिया था. इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है और वह इसे एकतरफा मानते हैं.

महाराष्ट्र में 265 तहसील सूखाग्रस्त घोषित

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. यानी राज्य के करीब 74 फीसदी तहसील सूखे की सूची में शामिल किए गए हैं. सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए फसल लोन पुनर्गठन, भूमि राजस्व में राहत और बिजली बिल में रियायत समेत कई उपायों की घोषणा की है. सूखाग्रस्त तहसीलों में मराठवाड़ा के साथ विदर्भ, पश्चिमी महाराष्ट्र, उत्तरी महाराष्ट्र और कोंकण के कुछ हिस्से भी शामिल हैं. ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और राहत कार्यों की निगरानी को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ाई है. (पीटीआई)

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