
मुजफ्फरपुर नगर निगम द्वारा अब तक 45 हजार किलो जैविक खाद बनाया जा चुका है और किसानों के बीच बेचा जा चुका है. किसानों को पांच रुपए प्रति किलों की दर से जैविक खाद दिया जाता है. इससे किसानों के साथ साथ नगर निगम को भी फायदा हो रहा है. नगर निगम द्वारा प्रतिदिन शहर से मिलने वाले कचरे से पांच क्विंटल जैविक खाद तैयार किया जाता है.

नगर निगम द्वारा जैविक खाद तैयार करने के किसानों को आसानी से और सस्ती कीमत पर जैविक खाद उपलब्ध हो जा रहा है. इससे किसानों को जैविक खेती करने में आसानी हो रही है. क्योंकि उन्हें सस्ते दाम में अच्छी गुणवत्ता वाला जैविक खाद आसानी से मिल जा रहा है. इससे नगर निगम को भी फायदा हो रहा है.

बता दे की आमतौर पर लोगों के घरों की रसोई से हर रोज बड़ी मात्रा में गीला कचरा निकलता है, जिनमें सब्जियों और खाने के बचे हुए अवशेष रहते हैं. बिना सोचे हुए इसे लोग घरों के बाहर नालियों में फेंक देते हैं. पर मुजफ्फरपुर नगर निगम ने इस कचरे के उचित इस्तेमाल करने के बारे में सोचा. क्योंकि इससे बनाया हुए जैविक खाद बेहद की प्रभावी होता है.

यही वजह है कि मुजफ्फरपुर में किचन वेस्ट और बाजार से फल और हरी सब्जी के गीले कचरे से नगर निगम जैविक खाद तैयार कर किसानों को बेहद सस्ते दाम पर उपलब्ध करा रहा है. इस जैविक खाद को लंबे प्रोसेस से तैयार किया जाता है.गीले कचड़े से जैविक खाद को तैयार कर रहे रमन कुमार ने बताया गीले कचरे से जैविक खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया में 40 से 45 दिन तक का समय लगता है.

सबसे पहले शहर से कचरा स्टोर कर उसमे से गीला कचरा अलग कर लिया जाता है. फिर उसकी कटाई की जाती है इसके बाद कंपोस्ट पीट में डाला जाता है. उसमे नारियल का छिलका, गोबर एक लेयर, भूसा का एक लेयर और फिर एक फीट गीला कचरा का लेयर डाला जाता है. उसके बाद इफेक्टिव
माइक्रोज का छिड़काव किया जाता है. फिर से 15 से 20 दिनो तक छोड़ देते है.

इसके बाद उसे फिर से पीट से बाहर निकाला जाता है और फिर से उसमें इफेक्टिव माइक्रोज का छिड़काव किया जाता. इसके बाद फिर से उसे पीट में डाल दिया जाता है.इस तरह से दो से तीन बार किया जाता है. गर्मी के दिनों में 60 दिनों में और सर्दी के दिनों में 90 दिनों में खाद तैयार हो जाता है. फिर उसे दो दिन सुखाया जाता है.

इसके बाद चालने की मशीन में डालकर चाल दिया जाता है जिससे खाद अलग और वेस्टेज अलग हो जाता है. फिर उसको बिक्री केंद्र के भेज दिया जाता है.
जैविक खाद के यूनिट हेड प्रीतम कुमार ने बताया की किसान इस जैविक खाद को बहुत पसंद कर रहे है. अब तक निगम द्वारा 45 टन खाद की बिक्री की जा चुकी है. किसानों को यह पांच रुपए प्रति किलो की दर से दिया जाता है. इस खाद के साइड इफेक्ट नहीं है.

कचरे से खाद तैयार करने में दो से ढाई महीने का वक्त लग जाता है. इस खाद को कई तरह की प्रक्रिया के बाद तैयार किया जाता है. जैविक खाद बनाने के लिए सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक काम होता है. जिसमे यहां के स्टाफ इस जैविक खाद को प्रोसेस के साथ तैयार करते है. इस खाद को लेकर किसानों की तरफ से बहुत बढ़िया रिस्पॉन्स मिल रहा है.
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