क्या बढ़ने वाले हैं चीनी के दाम? El Nino बन रहा वजह, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

क्या बढ़ने वाले हैं चीनी के दाम? El Nino बन रहा वजह, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

देश में चीनी के कारण लोगों की रसोई का बजट बिगड़ता दिख रहा है. दरअसल, वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें 11 साल की ऊंचाई पर पहुंच चुकी है. वहीं मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, अल नीनो की वजह से मॉनसून 2023 में हुई देरी का चीनी उत्पादन पर प्रभाव पड़ने की संभावना है. इसीलिए कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है.

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क्या बढ़ने वाले हैं चीनी के दाम? El Nino बन रहा वजह, पढ़ें पूरी रिपोर्टक्या बढ़ने वाले हैं चीनी के दाम?, सांकेतिक तस्वीर

चीनी उत्पादन के मामले में भारत विश्व के टॉप देशों में से एक है. वहीं चीनी से जुड़े जितने प्रोडक्ट तैयार किये जाते हैं उनमें भी भारत की स्थिति अव्वल है. लेकिन मौजूदा समय में चीनी की कीमतों को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है और देश में चीनी के कारण लोगों की रसोई का बजट बिगड़ता दिख रहा है. दरअसल, वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें 11 साल की ऊंचाई पर पहुंच चुकी है. जिससे शुगर के शेयरों में काफी बढ़त है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मांग बढ़ने और सप्लाई में कमी से चीनी की कीमतों में तेजी आई है. वहीं शुगर शेयरों में तेजी की वजह से अच्छी क्वालिटी की शुगर में 14 प्रतिशत, राजश्री शुगर्स में आठ प्रतिशत की तेजी देखने को मिल रही है. इसके अलावा, डालमिया भारत शुगर्स, सिम्भावली, शक्ति शुगर्स, धामपुर शुगर मिल्स, बजाज हिंद के शेयरों में भी पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है.

वहीं मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, अल नीनो की वजह से मॉनसून 2023 में हुई देरी का चीनी उत्पादन पर प्रभाव पड़ने की संभावना है. इसीलिए कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. जिसका प्रभाव शेयरों पर दिख रहा है.

भारत में घरेलू चीनी की कीमतें स्थिर

गौरतलब है कि एल नीनो की वजह से विभिन्न क्षेत्रों के मौसम पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है. हालांकि, इन वैश्विक मूल्य बढ़ोतरी के बावजूद, भारत में घरेलू चीनी की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं, जिसका क्रेडिट सरकार द्वारा कीमतों पर लगाई गई सीमा को जाता है. इससे देश के लोगों को कुछ राहत मिली है.

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इस बीच, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक भारत कम मॉनसूनी बारिश की स्थित से जूझ रहा है. मॉनसून को अभी महाराष्ट्र को कवर करना है और भारत में प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना है. वहीं मॉनसून में देरी की वजह से उत्पादन कम हो सकता है, जिसका अगले चीनी सीजन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और निर्यात पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है. इस बीच खबर है कि महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ फसलों की बुआई रोकने की सलाह दी है. इसके अलावा, सरकार ने सब्सिडी वाले लोन की समय सीमा भी बढ़ाई है. 

अल नीनो से शुगर उत्पादन हो सकता है प्रभावित 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के एमडी विजय बांका ने मॉनसून की धीमी रफ्तार और चीनी उत्पादन पर इसके संभावित प्रभावों के बारे में चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा, “मौसम विभाग सामान्य मॉनसून को लेकर उत्साहित है, लेकिन मॉनसून में देरी हुई है. इसलिए अगर अल नीनो होता है, तो इसका मतलब भारत के साथ-साथ ब्राजील में भी कम शुगर उत्पादन हो सकता है.

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बांका ने कहा, 'अगर मॉनसून की कमी रहती है तो सीजन 2023-24 में फसल पर इतना असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उसके बाद के सीजन पर इसका असर जरूर पड़ेगा. चीनी के कम उत्पादन का मतलब केवल यह होगा कि निर्यात के लिए अलग रखी जाने वाली चीनी कम होगी. इसलिए, सरकार उस संख्या को मॉडरेट करने जा रही है. उत्पादन कम होने पर वे संख्या को नियंत्रित करेंगे.

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