यूपी, बिहार के किसान पंजाब में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने को 'मजबूर', सांकेतिक तस्वीरदेशभर में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की रोपाई शुरू हो गई है. वहीं यूपी और बिहार से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, जिनमें कुछ सीमांत किसान भी शामिल हैं, जिनके पास जमीन है, हरियाणा और पंजाब के खेतों में काम करने के लिए इनदिनों पहुंचे हैं. इन प्रवासी मजदूर किसानों का कहना है कि गृह राज्य में काम के अवसर में अभाव और खेती से कम आमदनी होने की वजह से प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करना पड़ रहा है. दरअसल, ट्रिब्यून इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश और मुनीश यूपी में कृषि योग्य जमीन होने के बावजूद प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करने के लिए अंबाला पहुंचे हैं. मुकेश ने कहा कि काम के अवसरों की कमी और खेती से कम रिटर्न ने उन्हें और कुछ अन्य सीमांत किसानों को हरियाणा और पंजाब में प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया है. ऐसे में आइए इस खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं-
दरअसल, मुकेश ने कहा, “मेरे पास दो एकड़ जमीन है, जिस पर मैं धान और गेहूं की खेती करता हूं, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है. मेरे चार बच्चे हैं और दोनों फसलों की खेती से गुजारा करना मुश्किल है. मैं भी जुलाई में अपने खेतों में धान की खेती करूंगा. मैं इस साल लगभग 6,000 रुपये से 7,000 रुपये बचाने की उम्मीद कर रहा हूं, ताकि मैं उस पैसे का उपयोग अपने खेत की बुआई के लिए कर सकूं.”
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24 वर्षीय मुनीश ने कहा, “मेरे पास भी तीन एकड़ जमीन है, लेकिन कम आय और कोई अन्य काम के अवसर नहीं होने की वजह से मुझे पंजाब में एक मजदूर के रूप में काम करना पड़ रहा है. धान की रोपाई पूरी करने के बाद, मैं अपने खेतों में खेती करने के लिए वापस जाऊंगा और अगले साल लौटूंगा. यूपी में काम के अवसरों के अभाव में सैकड़ों मजदूर हरियाणा और पंजाब आते हैं.”
मालूम हो कि पंजाब के किसान अपने-अपने खेतों में काम करने के लिए मजदूरों को किराये पर लेने के लिए अंबाला रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं. पटियाला के एक किसान, कुलदीप सिंह ने कहा, “हर साल मजदूरी में 200 से 300 रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी की जाती है. पिछले साल, मैंने प्रति एकड़ 3,100 रुपये का भुगतान किया था. इस साल मजदूर प्रति एकड़ 3,300 रुपये और 20 लोगों के लिए भोजन की मांग कर रहे हैं. मजदूरी, खाद और बीज आदि की कीमतें हर साल बढ़ रही है, लेकिन रिटर्न में गिरावट आ रही है. वहीं, मजदूरों ने कहा कि पिछले साल उन्होंने प्रति एकड़ 3,000 रुपये से 3,200 रुपये लिए थे, इस साल उन्होंने प्रति एकड़ 3,500-4,000 रुपये मांगे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं प्रवासी मजदूर के रूप में उन्हें काम करने के लिए क्यों 'मजबूर' होना पड़ रहा है.
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जबकि, बीकेयू (चढूनी), अंबाला के प्रवक्ता राजीव शर्मा ने कहा, “कई प्रवासी मजदूरों के पास अपने गृह राज्यों में जमीन का छोटा सा टुकड़ा है, लेकिन एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अभाव में, वे उपज के लिए लाभकारी कीमत पाने में विफल रहते हैं. नतीजतन उन्हें हरियाणा और पंजाब में मज़दूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.”
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