किसानों से फर्जीवाड़े पर पुलिस ने लिया एक्शनगुजरात में राजकोट ग्रामीण पुलिस ने किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनकी जमीन कथित तौर पर अपने करीबियों के नाम कराने वाली गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि राजकोट और अहमदाबाद में कॉल सेंटर चलाकर किसानों को फोन किया जाता था और सब्सिडी वाले कृषि लोन का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाया जाता था. पुलिस के मुताबिक, अल्पेश दोंगा और उसके पार्टनर अक्षित अकबरी द्वारा राजकोट और अहमदाबाद में कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे.
राजकोट के 150 फीट रिंग रोड स्थित ट्विन्स टावर के एक ऑफिस में करीब 14 महिला कर्मचारी फोन पर काम करती मिलीं. पुलिस ने उनके बयान दर्ज किए हैं. अहमदाबाद के गणेश ग्लोरी, जगतपुरा रोड और गोता इलाके में भी ऐसे कॉल सेंटर चलाए जाने की जानकारी मिली है. पुलिस को यहां से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, खाली चेक, नोटबुक, डायरी, विजिटिंग कार्ड और कई दस्तावेज मिले हैं.
जांच में किसानों की जमीन से जुड़े 7/12 रिकॉर्ड, 8-A, सहमति पत्र और साटाखत समेत कई दस्तावेज बरामद हुए हैं. पुलिस की प्राथमिक जांच में करीब 32 जमीनों के दस्तावेज मिले हैं. पुलिस के अनुसार, राजकोट के अलावा मोरबी, जामनगर, सुरेंद्रनगर, अहमदाबाद, बनासकांठा और मेहसाणा के किसान भी इस नेटवर्क के संपर्क में आए हैं.
पुलिस ने फिलहाल करीब 1.47 लाख रुपये का मुद्देमाल जब्त किया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ित किसानों और जमीनों की संख्या बढ़ सकती है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास जरूरतमंद किसानों और जमीन खरीदने-बेचने वाले लोगों के मोबाइल नंबरों की सूची होती थी. महिला कर्मचारियों को बातचीत की स्क्रिप्ट देकर किसानों को फोन कराया जाता था. कर्मचारी कथित तौर पर अपना असली नाम छिपाकर फर्जी नाम से बात करते थे और खुद को 'बालाजी लोन' या 'गीता चैरिटेबल ट्रस्ट' से जुड़ा बताते थे.
किसानों को खेती की जमीन और मकान पर दो करोड़ रुपये तक लोन देने का लालच दिया जाता था. इसके बाद उन्हें ऑफिस बुलाकर साटाखत के आधार पर लोन देने की बात कही जाती थी. आरोप है कि इसी प्रक्रिया में जमीन के बिक्री दस्तावेज आरोपियों के करीबियों के नाम करा लिए जाते थे.
पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाने से पहले किसानों को यह बताया जाता था कि वहां पूछे जाने वाले सवालों का क्या जवाब देना है. उनसे कैमरे के सामने यह भी कहलवाया जाता था कि वे अपनी इच्छा से जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम कर रहे हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है.
बिक्री दस्तावेज में दर्ज रकम किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती थी, जबकि बाकी रकम कथित तौर पर अलग तरीके से दी जाती थी. इसके बाद किसानों से ब्याज भी वसूला जाता था. जमीन के दस्तावेज की नोटिस मिलने पर उन्हें पता चलता था कि जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो चुकी है.
पुलिस के अनुसार, जमीन का कब्जा शुरुआत में मूल किसान के पास ही रहने दिया जाता था. बाद में नया मालिक जमीन का कब्जा मांगता था और विवाद की स्थिति पैदा होती थी. मामला आरोपियों तक पहुंचने पर कथित तौर पर मध्यस्थता के नाम पर किसान से जमीन वापस करने के लिए अतिरिक्त रकम मांगी जाती थी.
पडधरी पुलिस स्टेशन में सरपदड़ गांव के 25 वर्षीय प्रज्ञेश झालावड़िया ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के मुताबिक, उसने वर्ष 2022 में अल्पेश दोंगा से 5.50 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे. उसने दावा किया कि मूल रकम और ब्याज मिलाकर 9.86 लाख रुपये चुका दिए गए, लेकिन नौ बीघा जमीन वापस नहीं की गई.
प्रज्ञेश की शिकायत के अनुसार, जमीन वापस लेने के लिए उससे 40 लाख रुपये और मांगे गए. प्रज्ञेश ने दावा किया कि उसने अल्पेश दोंगा को 40 लाख रुपये, जबकि चंदू वीरडिया और पीयूष वीरडिया से जुड़े लेनदेन में 54 लाख रुपये दिए. उसने एक करोड़ रुपये से ज्यादा चुकाने का दावा किया है.
अल्पेश दोंगा के खिलाफ राजकोट शहर में सात और राजकोट ग्रामीण में छह मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है. इनमें कई मामले ब्याज पर पैसे देने और जमीन से जुड़े हैं.
राजकोट ग्रामीण पुलिस ने अल्पेश दोंगा की कस्टडी लेने की प्रक्रिया शुरू की है. वहीं हिरेन लुणागरिया को गिरफ्तार किया गया है. अक्षित अकबरी उर्फ हैप्पी पटेल, चंदू वीरडिया और पीयूष वीरडिया समेत अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
इधर, राजकोट ग्रामीण के एसपी विजय सिंह गुर्जर ने कहा कि पुलिस की जांच जारी है और बरामद दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क और जमीन से जुड़े मामलों की पड़ताल की जा रही है. (रौनक मजीठिया की रिपोर्ट)
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