Bihar Mandi: अनार, काला अंगूर 100 के ऊपर, बेर 40 तक सिमटा, किसान-व्यापारी दोनों नाखुश

Bihar Mandi: अनार, काला अंगूर 100 के ऊपर, बेर 40 तक सिमटा, किसान-व्यापारी दोनों नाखुश

राज्य की सबसे बड़ी थोक फल मंडी बाजार समिति में अनार, सेब और काला अंगूर की कीमत 100 के पार पहुंच गई है, जबकि बंगाल और बिहार के अमरूद, बेर 40 के नीचे बिक रहे हैं. थोक फल मंडी बाजार समिति के नेताओं का आरोप है कि मंडी में अनधिकृत फल के व्यापारियों के कारण किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला बढ़ रहा है.

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 Bihar Mandi: अनार, काला अंगूर 100 के ऊपर, बेर 40 तक सिमटा, किसान-व्यापारी दोनों नाखुशबिहार की सबसे बड़ी फल मंडी बाजार समिति पटना

बिहार में पटना की बाजार समिति को राज्य की सबसे बड़ी थोक फल मंडी कहा जाता है, लेकिन यहां की व्यवस्था कंट्रोल से बाहर होने लगी है. ना तो व्यापारी खुश हैं, ना किसान. स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि इस मंडी में अनजान व्यापारी भी पहुंचने लगे हैं, जो सौदेबाजी के नाम पर किसानों से ठगी भी करते हैं. किसानों का आरोप है कि उन्हें अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा. अनार और काला अंगूर जैसे फलों के दाम इस समय 100 रुपये प्रति किलो से ऊपर है, लेकिन बसंत पंचमी का त्योहार होने के बावजूद बेर की कीमत 40 रुपये से भी नीचे बनी हुई है. जबकि त्योहारों में बेर की कीमत काफी बढ़ जाती है.

इस मंडी में विभिन्न राज्यों से फल आते हैं और यहीं से राज्य के जिलों में फल की सप्लाई भी होती है. इन दिनों त्योहार व शादी का सीजन चल रहा है. इसके साथ ही फलों की मांग भी तेज हो गई है. वहीं राज्य की सबसे बड़ी फल मंडी में अनार, सेब, काला अंगूर के भाव अधिक हैं. जबकि अमरूद, संतरा व बेर के भाव अन्य फलों की तुलना में कम हैं. 2007 में बाजार समिति भंग होने से व्यापारियों का कहना है कि फल मंडी में कानून नाम का कुछ नहीं है. यहां हर व्यापारी अपने अनुसार फलों की खरीद बिक्री कर रहा है. वहीं फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद कुमार कहते हैं कि बाजार समिति भंग होने के बाद सरकार का मंडी से सीधा प्रभाव खत्म हो गया है. अब यहां कई ऐसे व्यापारी फल का व्यापार कर रहें हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है. इसके चलते किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला बढ़ रहा है. वे किसानों का पैसा लेकर गायब हो जा रहे हैं.

बता दें कि 2007 से पहले बाजार समितियों का प्रबंधन बिहार राज्य कृषि विपणन परिषद के तहत होता था. फल, सब्जी व मछली की नीलामी बाजार समिति के प्रांगण में होती थी लेकिन जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने कृषि विपणन परिषद को भंग कर दिया. बाजार समिति करीब 39 एकड़ से अधिक एरिया में फैला हुआ है और करीब 300 से अधिक दुकान हैं.

थोक मंडी में फल के भाव

प्रदेश की सबसे बड़ी थोक फल मंडी बाजार समिति में हर रोज करीब 60 से 70 ट्रक विभिन्न राज्य के फल आते हैं. वहीं बंसत पंचमी व शादी का सीजन के कारण फलों की मांग बढ़ी है. जिसके कारण फलों के भाव में भी अंतर आया है. वहीं फल मंडी में संतरा 40 से 45 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. संतरा व्यापारी रमाकांत यादव कहते हैं कि अभी संतरा कम आ रहा है. इसके चलते भाव ज्यादा है.वहीं फरवरी के बीच में 25 रुपये तक भाव आ जाएगा. हाल के समय में करीब संतरा के 12 से 13 ट्रक राजस्थान व पंजाब से आ रहे हैं. अनार, अमरूद, सेब के व्यापारी महताब आलम कहते हैं कि अनार का भाव 1200 से लेकर 650 रुपये प्रति दस किलो है. सेब 120 से 75 रुपए प्रति किलो है. एप्पल बेर 40 से 45 रुपये,अंगूर 90 से 60 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. काला अंगूर 130 से 120 रुपये तक है मध्य प्रदेश के अमरूद 69 से 65 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं और बिहार के अमरूद 35 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं.

मंडी से जुड़ी सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ

फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशि कुमार कहते हैं कि बाजार समिति भंग होने से पिछले कुछ सालों में ऐसा देखने को मिला है कि किसानों का पैसा कुछ व्यापारी लेकर गायब हो जा रहे हैं. थोक फल मंडी में 30 प्रतिशत के आसपास अनधिकृत व्यापारी हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है. वहीं जब फल मंडी सरकार की निगरानी में था. तो इस तरह की समस्या नहीं होती थी. राज्य में मंडी व्यवस्था नहीं होने से केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ मंडी व व्यापारियों को नहीं मिल पा रहा है.

फल सब्जियों के प्रबंधन के लिए हो उचित व्यवस्था

फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जय प्रकाश वर्मा कहते हैं कि सब्जियों के रखरखाव को लेकर कोल्ड स्टोरेज की सबसे ज्यादा जरूरत है. वहीं हाल के समय में जो कोल्ड स्टोरेज है, उसकी हालत बहुत सही नहीं हैं. बाजार समिति भंग होने से सुरक्षा से लेकर साफ सफाई की दिक्कत है. पहले बाजार समिति सरकार के कंट्रोल में था. उस समय अधिकृत दुकानों से फलों की खरीद बिक्री होती थी. लेकिन अब बाजार पर कोई कंट्रोल नहीं है. राज्य सरकार को इसके बारे में सोचने की जरूरत है. 

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