
केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की एक रिपोर्ट की मानें तो साल 2021-22 में खूब मुर्गे-मुर्गी खाए गए हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट रिकी थापर का कहना है कि देश में हर साल छह से सात फीसद चिकन की खपत बढ़ रही है. मंत्रालय ने रिपोर्ट जारी करते हुए बताया है कि इस साल देश में 306 करोड़ ब्रॉयलर चिकन खाया गया है. आंकड़ें बताते हैं कि 2021-22 में 48 लाख टन चिकन खाया गया था. अकेले गाजीपुर, दिल्ली मंडी से रोजाना पांच लाख ब्रॉयलर मुर्गों की सप्लाई होती है.

केन्द्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में पांच राज्य ऐसे हैं, जो भैंस के मीट का सबसे ज्यादा उत्पादन करते हैं. जिसमे उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है. यहां साल 2021-22 में 6.20 लाख मीट्रिक टन भैंस के मीट का उत्पादन हुआ था.

लेकिन जैसे ही हमे एफएमडी फ्री जोन का सर्टिफिकेट मिलने लगेगा तो यह देश भी हमारे यहां से मीट की खरीदारी शुरू कर देंगे. यूरोपियन यूनियन और विकसित देश भी मीट का एक बड़ा बाजार हैं. इसक अलावा डेयरी प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट भी हमारे यहां से 300 मिलियन का है, इसको भी एक बड़ी रफ्तार मिलेगी.

सीआईआरजीके डायरेक्टर मनीष कुमार चेटली का कहना है कि बकरे और बकरियों को खासतौर पर ऑर्गेनिक चारा खिलाने का बड़ा फायदा है. जब बकरे का मीट एक्सपोर्ट होता है तो उससे पहले हैदराबाद की एक लैब में मीट की जांच होती है. जांच में यह देखा जाता है कि मीट में किसी तरह के नुकसानदायक पेस्टीसाइट तो नहीं है. और यह सिर्फ बकरे के मीट ही नहीं बीफ के मामले में भी ऐसा ही होता है.

अगर इसमे से तेलंगाना को निकाल दें तो बाकी के चारों राज्य में 94 फीसद से लेकर 100 फीसद तक एफएमडी का टीकाकरण हो चुका है. ऐसे में इन राज्यों को जल्द एफएमडी फ्री जोन घोषित किए जाने की उम्मीद है. तेलंगाना में अभी सिर्फ 77 फीसद ही टीकाकरण हुआ है. गौरतलब रहे साल 2020-21 में भैंस के मीट का 15.81 लाख मीट्रिक टन और 2021-22 में 16.25 लाख मीट्रिक टन मीट का उत्पादन हुआ था.

राजेश कुमार सिंह ने बातचीत के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि अभी हमारे देश में 23 से 24 हजार करोड़ रुपये के बफेलो मीट के एक्सपोर्ट का कारोबार है. लेकिन खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) के चलते अभी यूरोपियन यूनियन और विकसित देश हमारे ग्राहक नहीं हैं.
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