अमेरिकी टैरिफ से तमिलनाडु की सीफूड इंडस्ट्री संकट में, लाखों मछुआरों की रोज़ी-रोटी पर संकट

अमेरिकी टैरिफ से तमिलनाडु की सीफूड इंडस्ट्री संकट में, लाखों मछुआरों की रोज़ी-रोटी पर संकट

अमेरिका द्वारा लगाया गया 50% टैरिफ तमिलनाडु के सीफूड निर्यात को भारी नुकसान पहुँचा रहा है. थूथुकुडी के लाखों मछुआरों और श्रमिकों की रोज़ी-रोटी खतरे में है. सरकार से जल्द राहत की मांग.

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अमेरिकी टैरिफ से तमिलनाडु की सीफूड इंडस्ट्री संकट में, लाखों मछुआरों की रोज़ी-रोटी पर संकटअमेरिका ने भारतीय झींगा पर लगाई ड्यूटी

तमिलनाडु की समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात इंडस्ट्री पर अमेरिकी सरकार के 50% टैरिफ ने गहरी चोट पहुंचाई है. इससे न केवल ₹23,000 करोड़ के निर्यात पर असर पड़ा है, बल्कि एक लाख से अधिक लोगों की आजीविका भी खतरे में पड़ गई है. हाल ही में अमेरिका ने भारत से आने वाले सीफूड पर 50% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है. इससे तमिलनाडु के तटीय जिलों जैसे थूथुकुडी से अमेरिका को होने वाला सीफूड निर्यात पूरी तरह से रुक गया है. झींगा (prawn), केकड़ा (crab), ऑक्टोपस जैसे सीफूड के कंटेनर वापस लौटाए जा रहे हैं.

कंटेनर लौटाए जाने से मचा हड़कंप

थूथुकुडी और आसपास के इलाके के निर्यातकों ने बताया कि अमेरिकी आयातकों ने उन्हें साफ कह दिया है कि वे अब सीफूड की खेप स्वीकार नहीं करेंगे. कई कंटेनर जो समुद्र में भेजे गए थे, उन्हें अब बीच रास्ते से ही वापस बुलाया जा रहा है. इससे निर्यातकों और हजारों श्रमिकों के बीच दहशत का माहौल है.

महिलाओं और मछुआरों पर सबसे ज्यादा असर

इस उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं की है जो सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में काम करती हैं. अब जब निर्यात बंद हो गया है, तो उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है. साथ ही झींगा पालन करने वाले किसानों और पारंपरिक मछुआरों की कमाई भी रुक गई है.

नेताओं की चिंता और सवाल

थूथुकुडी की सांसद और डीएमके नेता कनिमोझी ने इस मुद्दे को "गंभीर और दिल तोड़ने वाला" बताया है. उन्होंने कहा: “यह देखकर दिल टूटता है कि थूथुकुडी से निर्यात किया गया समुद्री खाद्य समुंदर के बीच से ही वापस लौटाया जा रहा है. क्या बीजेपी सरकार लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी की सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाएगी? या हमेशा की तरह इन्हें छोड़ देगी?”

निर्यातकों ने सरकार तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग

इंडियन फूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के तमिलनाडु अध्यक्ष सेल्विन प्रभु ने बताया कि पिछले 20 सालों से अमेरिका को सीफूड भेजा जा रहा था. लेकिन अब यह कारोबार पूरी तरह से रुक गया है.

उनके अनुसार: "भारत से ₹63,000 करोड़ का सीफूड निर्यात होता है, जिसमें ₹23,000 करोड़ का निर्यात सिर्फ अमेरिका को होता है. अब यह सब ठप हो गया है. हजारों लोगों की नौकरियां जा रही हैं. हम सरकार से तुरंत समाधान की मांग करते हैं."

सरकार से क्या है उम्मीद?

निर्यातक और मछुआरे अब केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं कि वह अमेरिका के साथ बातचीत करे या राहत पैकेज दे ताकि तमिलनाडु की सीफूड इंडस्ट्री को फिर से पटरी पर लाया जा सके.

अमेरिका द्वारा लगाया गया टैरिफ सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों की जिंदगी पर असर डाल रहा है. तमिलनाडु के मछुआरे, किसान, श्रमिक और महिलाएं आज सरकार की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं. अब सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार समय रहते इस संकट का समाधान निकालेगी?

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