सोलापुर में प्याज किसानों का गुस्सा, कम दामों पर जोरदार आंदोलन और MSP की मांग

सोलापुर में प्याज किसानों का गुस्सा, कम दामों पर जोरदार आंदोलन और MSP की मांग

सोलापुर APMC में प्याज के घटते दामों से किसानों में नाराजगी फैल गई. स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने ‘बोंबाबोंब’ आंदोलन कर नीलामी प्रक्रिया को रोका और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया. किसान मांग कर रहे हैं प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹4,500 प्रति क्विंटल, ₹3,000 का अनुदान और नीलामी में पारदर्शिता, ताकि उन्हें उचित मूल्य मिले.

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सोलापुर में प्याज किसानों का गुस्सा, कम दामों पर जोरदार आंदोलन और MSP की मांगप्याज की कीमतों में गिरावट

सोलापुर कृषि उत्पन्न बाजार समिति (APMC) में प्याज के दामों में गिरावट ने किसानों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है. स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने इस पर आक्रामक रुख अपनाते हुए बाजार में ‘बोंबाबोंब’ आंदोलन छेड़ दिया. कार्यकर्ताओं ने नीलामी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. इस दौरान किसान व्यापारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए.

प्याज के घटते दाम और किसानों की परेशानी

सोलापुर बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज को केवल 10 से 12 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है. वहीं, प्रतिदिन लगभग 200 से 250 ट्रक प्याज की आवक हो रही है. लागत के मुकाबले इतना कम भाव मिलने के कारण किसान बेहद परेशान हैं. उत्पादन, मजदूरी, परिवहन और भंडारण पर खर्च बढ़ चुका है, लेकिन बाजार में मिलने वाला मूल्य इतना कम है कि किसानों के हाथ में कुछ भी नहीं बच रहा.

आंदोलन की वजहें और मांगें

किसानों और स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने सीधे आंदोलन करने का निर्णय लिया. उनका कहना है कि प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹4,500 प्रति क्विंटल होना चाहिए. इसके अलावा किसानों को प्रति क्विंटल ₹3,000 का अनुदान दिया जाए. उन्होंने नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की भी मांग की. व्यापारियों द्वारा कथित शोषण के खिलाफ किसानों ने जोरदार नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया.

उत्पादन लागत और बाजार की असमानता

किसानों का कहना है कि प्याज की खेती में सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि परिवहन और भंडारण पर भी भारी खर्च आता है. मजदूरी की कीमतें बढ़ गई हैं, और खेतों से मंडी तक प्याज लाने में भी अतिरिक्त खर्च लगता है. इन सबको ध्यान में रखते हुए, मिल रहे दाम बेहद कम हैं और इससे किसान आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं.

प्रशासन और बाजार प्रबंधन की भूमिका

बाजार समिति में प्रशासन और अधिकारियों को किसानों के गुस्से और नाराजगी का ध्यान रखना पड़ रहा है. स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल अपनी मांगों को लेकर है, और वे चाहते हैं कि मंडी में नीलामी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो. इससे भविष्य में किसानों के साथ अन्याय नहीं होगा और उचित मूल्य मिल सकेगा.

आम लोगों और किसानों के लिए असर

यदि सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान देती है और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है, तो प्याज उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. इससे न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी स्थिर और उचित दाम पर प्याज उपलब्ध होगी. वहीं, बाजार में असमानता और व्यापारियों के शोषण की समस्या कम हो सकती है.

सोलापुर APMC में प्याज के दाम गिरने से किसानों का आक्रोश न्यायसंगत है. स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने न केवल आंदोलन किया, बल्कि स्पष्ट मांगें भी रखीं. किसान चाहते हैं कि उनकी मेहनत और लागत के हिसाब से उचित मूल्य मिले. सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे उनकी आवाज सुने और प्याज की नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करें. इससे किसानों और बाजार दोनों को संतुलित और स्थिर वातावरण मिलेगा. (विजयकुमार बाबर का इनपुट)

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