
दुर्ग की ड्रोन दीदी जागृति साहूछत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम मतवारी की रहने वाली जागृति साहू आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं. एक सामान्य गृहिणी से लेकर ‘लखपति दीदी’ और अब ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली जागृति ने साबित कर दिया है कि अवसर और संकल्प मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत चयनित होने के बाद जागृति ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और आज वह एक प्रमाणित ड्रोन पायलट के रूप में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ रही हैं. उनके प्रयासों से न केवल खेती में तकनीकी बदलाव आया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते भी खुले हैं.
जागृति साहू बताती हैं कि उनका जीवन पहले एक सामान्य गृहिणी की तरह था. वर्ष 2023 में ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत इफको के माध्यम से उनका चयन हुआ. चयन की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसे अपने जीवन का नया अवसर माना और तकनीकी क्षेत्र में कदम रखा.
इफको द्वारा उन्हें 15 दिनों के विशेष प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर भेजा गया, जहां उन्होंने ड्रोन उड़ाने और कृषि कार्यों में उसके उपयोग की बारीकियां सीखीं. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने खेतों में ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव का काम शुरू किया.
जागृति कहती हैं कि शुरुआत में यह सफर चुनौतीपूर्ण था, लेकिन आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी.
जागृति के अनुसार, खेती में मजदूरों की कमी किसानों की बड़ी समस्या रही है. ऐसे में ड्रोन तकनीक किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है. जहां पहले एक खेत में दवा या उर्वरक का छिड़काव करने में घंटों लग जाते थे, वहीं अब यह काम महज 5 से 7 मिनट में पूरा हो जाता है.

ड्रोन के जरिए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे किसानों की लागत कम हो रही है और फसलों को बेहतर पोषण मिल रहा है. इससे समय, श्रम और खर्च तीनों की बचत हो रही है.
दो विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड की डिग्री हासिल कर चुकी जागृति का बचपन से सपना शिक्षक बनने का था. हालांकि परिस्थितियों के कारण वह अपना यह सपना पूरा नहीं कर सकीं. इससे वह निराश भी हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
शादी के बाद उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया. उनका मानना है कि यदि उन्हें रोजगार के लिए मार्गदर्शन नहीं मिला, तो वह स्वयं अन्य महिलाओं के लिए मार्गदर्शक बनेंगी. आज वह महिला समूहों के साथ जुड़कर उन्हें आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं.
जागृति का कहना है कि ड्रोन तकनीक ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. जहां पहले ग्रामीण महिलाएं मजदूरी कर प्रतिदिन लगभग 300 रुपये तक कमा पाती थीं, वहीं ड्रोन संचालन और उससे जुड़े कार्यों के माध्यम से अब कई महिलाएं 3,000 से 4,000 रुपये प्रतिदिन तक की आय कमा रही हैं.
उनके अनुसार ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना महिलाओं को तकनीकी क्षेत्र से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है.
जागृति साहू ने सिर्फ ड्रोन तकनीक तक ही खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल की. मशरूम खेती में उत्कृष्ट कार्य के कारण उन्हें ‘मशरूम लेडी ऑफ दुर्ग’ के नाम से भी पहचान मिली है.
ड्रोन तकनीक के विस्तार को लेकर जागृति ने सुझाव दिया कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ड्रोन चलाने के लिए अतिरिक्त बैटरियां उपलब्ध कराएं, तो काम की गति और दक्षता बढ़ाई जा सकती है. उनका कहना है कि वर्तमान में सीमित बैटरियों के कारण संचालन प्रभावित होता है, जबकि अतिरिक्त बैटरियां मिलने से अधिक क्षेत्र में कम समय में सेवाएं दी जा सकेंगी.
आज जागृति साहू की सफलता यह संदेश देती है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं. उनका सफर महिला सशक्तिकरण, नवाचार और कृषि आधुनिकीकरण का जीवंत उदाहरण बन चुका है. ग्रामीण परिवेश से निकलकर ड्रोन पायलट बनने तक की उनकी कहानी हजारों महिलाओं को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दे रही है.(रघुनंदन पांडा की रिपोर्ट)
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