मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी में तेजी (फाइल फोटो)मध्य प्रदेश में किसानों से गेहूं की सरकारी खरीद लगातार जारी है. राज्य सरकार द्वारा किसानों की सुविधा और तेजी से खरीद सुनिश्चित करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं. अब तक 7 लाख 48 हजार किसानों से 39 लाख 2 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है और किसानों को 6490.56 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है.
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया है. वहीं, देयक जारी करने का समय रात 12 बजे तक बढ़ाया गया है. इससे किसानों को देर शाम तक गेहूं तौलने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने में आसानी होगी.
अब तक 14 लाख 75 हजार किसानों ने गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक कराए हैं. गेहूं खरीद की अंतिम तिथि को भी 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दिया गया है.
किसानों को लंबे इंतजार से बचाने के लिए प्रत्येक खरीद केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है. साथ ही जिलों को जरूरत के अनुसार तौल कांटों की संख्या और बढ़ाने का अधिकार दिया गया है. खाद्य विभाग की ओर से प्रति घंटे स्लॉट बुकिंग और खरीद की मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो.
राज्य में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार के 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस को मिलाकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है. सरकार ने क्वालिटी के मानकों में भी राहत दी है.
इसके तहत, कम चमक वाले गेहूं की सीमा 50 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है और सिकुड़े हुए दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की गई है. खराब दानों की सीमा 6 प्रतिशत तक कर दी गई है. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कम परेशानी होगी.
गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान और अन्य जन-सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. अब किसान अपने जिले के किसी भी खरीद केंद्र पर गेहूं बेच सकते हैं.
गेहूं के अलावा चना और मसूर की सरकारी खरीद भी जारी है. इन फसलों की खरीद 30 मार्च से शुरू हुई थी और 28 मई 2026 तक चलेगी. चना का खरीद लक्ष्य 6.49 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है जबकि मसूर का खरीद लक्ष्य 6.01 लाख मीट्रिक टन है.
इसके अलावा अरहर (तूर) दाल की 1.31 लाख मीट्रिक टन खरीद का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है.
किसानों की उपज के सुरक्षित भंडारण के लिए ‘खाद्यान्न भंडारण योजना’ के तहत पहले ही 3.55 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम तैयार किए जा चुके हैं. इसके अलावा 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 11 लाख मीट्रिक टन क्षमता के लिए रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है.
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि इन फैसलों से गेहूं समेत रबी फसलों की खरीद में तेजी आई है. समय बढ़ाने, तौल कांटे बढ़ाने और क्वालिटी मानकों में राहत देने से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को बिना परेशानी के अपनी उपज का पूरा दाम समय पर मिल सके.
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