सुंदरगढ़ में बढ़ा धान की खेती का रकबा, अधिक एमएसपी की चाहत में धान की खेती कर रहे किसान

सुंदरगढ़ में बढ़ा धान की खेती का रकबा, अधिक एमएसपी की चाहत में धान की खेती कर रहे किसान

ऊपरी जमीन पर धान की खेती करने से किसानों को प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल तक ही उपज प्राप्त होती है. जबकि मध्यम और निचली भूमि पर खेती करके किसान प्रति एकड़ 25-30 क्विंटल या उससे अधिक पैदावार हासिल कर सकते हैं.

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सुंदरगढ़ में बढ़ा धान की खेती का रकबा, अधिक एमएसपी की चाहत में धान की खेती कर रहे किसानसुंदरगढ़ में धान की खेती को अपना रहे किसान (सांकेतिक तस्वीर)

ओडिशा के संदरगढ़ जिले में किसान एक बार फिर धान की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और जिले में धान की खेती का रकबा बढ़ा है. यहां पर जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे लेकिन इन प्रयासों के बावजूद कई किसान फिर से धान की खेती कर रहे हैं. माना जा रहा है कि यहां पर सरकार ने धान पर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी देने की घोषणा की है. इसके बाद से ही किसान अधिक एमएसपी की लालच में धान की खेती की तरफ आकर्षित हुए हैं. किसानों ने इस बार सिर्फ धान की खेती सिर्फ निचली जमीन पर ही नहीं ऊपरी जमीन पर भी की है. 

बता दें की देश के अधिकांश क्षेत्रों में धान की खेती वर्षा आधारित होती है. निचली जमीन इसकी खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है. ऊपरी जमीन में धान की अधिक करने में अधिक मेहनत लगती है, साथ ही खर्च भी अधिक होता है, जबकि इसके मुकाबले लाभ कम होता है और खतरा भी अधिक रहता है. खास कर जब मॉनसून अनिश्चित होता है और अच्छी बारिश नहीं होती है तो किसानों को नुकसान हो जाता है. इसलिए सुंदरगढ़़ के किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी गई थी. यहां पर खरीफ के सीजन में कुल 3.13 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है, जिसे घटाकर 1,94,700 हेक्टेयर कर दिया गया है, जबकि गैर-धान फसलों के लिए लक्ष्य बढ़ाकर 1,18,300 हेक्टेयर कर दिया गया है.

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बढ़ा है धान की खेती का रकबा

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2013 में 2.14 लाख हेक्टेयर जमीन में धान की खेती होती थी. जबकि 99,000 हेक्टेयर धान से अलग फसलों की खेती की जाती थी. इसके बाद जिले में फसल विविधीकरण को लेकर प्रयास किए गए. इसका परिणाम यह हुआ कि 19,300 हेक्टेयर जमीन में गैर धान के फसलों की खेती होने लगी. इसके लिए कृषि विभाग की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे थे. हालांकि विभाग के उन प्रयासों को झटका लगा जब किसान फिर से धान की खेती की तरफ आने लगे. विभाग की तरफ से यहां ऊंचे इलाकों में धान की खेती जगह अधिक लाभ वाली दूसरी फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा था. 

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निचली जमीन में होती है अधिक उपज

सुंदरगढ़ के मुख्य जिला कृषि अधिकारी हरिहर नायक ने कहा कि ऊपरी भूमि पर धान की खेती कभी भी किसानों के लिए फायदेमंद नहीं रही है. ऊपरी जमीन पर धान की खेती करने से किसानों को प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल तक ही उपज प्राप्त होती है. जबकि मध्यम और निचली भूमि पर खेती करके किसान प्रति एकड़ 25-30 क्विंटल या उससे अधिक पैदावार हासिल कर सकते हैं.  उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्य में मॉनसून की जो स्थिति रहती है उसके अनुसार अन्य फसलों की खेती करना ही अधिक लाभकारी हो सकता है. हालांकि अधिक एमएसपी की चाहत में किसान धान की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. लेकिन प्रशासन की तरफ से फसल विविधीकरण के लिए प्रयास जारी रहेगा. 

 

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