Economic Survey: महाराष्ट्र की कृषि वृद्धि दर में तेज गिरावट, आर्थिक सर्वे में सामने आई बड़ी वजह

Economic Survey: महाराष्ट्र की कृषि वृद्धि दर में तेज गिरावट, आर्थिक सर्वे में सामने आई बड़ी वजह

महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने खेती को लेकर एक अहम संकेत दिया है. पिछले साल सबसे तेज बढ़ने वाला कृषि क्षेत्र इस बार अचानक सुर्खियों में है. मौसम की मार और फसल नुकसान के बीच रिपोर्ट में ऐसा क्या सामने आया, जिसने कृषि की रफ्तार को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी. पढ़ें पूरी खबर...

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Economic Survey: महाराष्ट्र की कृषि वृद्धि दर में तेज गिरावट, आर्थिक सर्वे में सामने आई बड़ी वजहमहाराष्‍ट्र की कृषि विकास दर में गिरावट

महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में तेज रफ्तार से बढ़ती दिख रही है, लेकिन कृषि क्षेत्र की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है. राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, इस वर्ष कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की वृद्धि दर में तेज गिरावट दर्ज की गई है. इसकी बड़ी वजह खराब मौसम और बाढ़ से हुई व्यापक फसल क्षति बताई गई है. वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने गुरुवार को राज्य विधानसभा और विधान परिषद में महाराष्ट्र आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया. 

इतनी रहेगी कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर

सर्वे के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर इस साल घटकर करीब 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह करीब 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक बारिश और बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर फसलें प्रभावित हुईं, जिससे कृषि उत्पादन पर सीधा असर पड़ा. इसके बावजूद राज्य की कुल आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 में लगभग 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है. 

खरीफ का रकबा पिछले साल से मामूली रूप से कम 

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि को सहारा दिया है. सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत से बढ़कर 9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि उद्योग क्षेत्र की वृद्धि 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 5.7 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. राज्य में खरीफ 2025-26 के दौरान कुल बुवाई क्षेत्र 157.27 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 158.17 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 0.6 प्रतिशत कम है.

कृषि‍ क्षेत्र के लिए जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती

हालांकि, कुछ फसलों के रकबे में बढ़ोतरी का अनुमान है. मक्का की खेती का क्षेत्र लगभग 30.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जबकि गन्ने का रकबा करीब 17.6 प्रतिशत बढ़ने की संभावना जताई गई है. दूसरी ओर दलहन, तिलहन और कपास के रकबे में कमी का अनुमान है. आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र के सामने कई संरचनात्मक चुनौतियों की भी पहचान की गई है. इनमें जलवायु परिवर्तन, भूमि और जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता, बीज और उर्वरकों की बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताएं प्रमुख हैं.

भारी बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही

रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर 2025 के बीच राज्य में हुई अत्यधिक बारिश और बाढ़ ने लगभग 94.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचाया. इससे राज्य के करीब 1.16 करोड़ किसान प्रभावित हुए. इन नुकसानों की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने करीब 9,022 करोड़ रुपये की राहत सहायता मंजूर की.

मॉनसून 2025 के दौरान महाराष्ट्र में अक्टूबर तक औसत से लगभग 109.1 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई. राज्य के 355 तालुकों में से 149 में औसत से अधिक बारिश हुई, 181 तालुकों में सामान्य बारिश दर्ज की गई, जबकि 25 तालुकों में औसत से कम बारिश हुई.

6 मार्च को बजट पेश करेंगी सीएम फडणवीस

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से मई 2025 के बीच बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से भी किसानों को नुकसान झेलना पड़ा. इस अवधि में करीब 4 लाख किसान प्रभावित हुए और 1.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें खराब हुईं. इसके लिए राज्य सरकार ने लगभग 337.42 करोड़ रुपये की राहत राशि स्वीकृत की.

बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 6 मार्च को राज्य का बजट पेश करने वाले हैं. पूर्व वित्त मंत्री अजीत पवार के निधन के बाद उनके विभागों का पुनर्वितरण किया गया है और फिलहाल वित्त विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है.

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