तरकारी बूथअब बिहार सरकार सुधा डेयरी के बूथ की तरह तरकारी बूथ बनाने की तैयारी में है, यानी अब जिस तरह से पटना शहर सहित राज्य के अन्य जिलों में सुधा अपने दूध या अन्य उत्पाद को बेचने के लिए एक बूथ केंद्र बना रखा है, उसी तरह अब सहकारिता विभाग राज्य में सब्जियों की बिक्री कराएगा. ये बातें सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही. उन्होंने बताया कि मधुबनी के सकरी और दरभंगा रैयाम चीनी मिल इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से स्थापित और संचालित किया जाएगा, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नवंबर में किया जाना है. वहीं, बिहार के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ रबी सीजन से मिलेगा.
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि सब्जियों को इकट्ठा करने वाले केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं और बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी. इसके लिए 350 पंचायतों में सब्जी रखने के लिए संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे और 50 प्रखंडों में जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. आगे उन्होंने बताया कि अब सुधा डेयरी के बूथ की तरह तरकारी बूथ 'वेजफेड' के माध्यम से जगह-जगह खोले जाएंगे. इससे रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे. इससे स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा. वहीं, 16 अगस्त 2026 से एक माह तक विशेष अभियान चलाकर दुग्ध सहकारी समितियों, पैक्स, पीवीसीएस, अन्य सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के खाते खोले जाएंगे.
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि नवंबर में मधुबनी के सकरी में पूर्व से बंद पड़े चीनी मिल की भूमि पर नए सहकारी चीनी मिल और दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया जाएगा, जो इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से स्थापित और संचालित किया जाएगा. वहीं, उन्होंने बताया कि चीनी मिल के साथ वहां पर पावर जनरेशन प्लांट, डिस्टलरी और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की भी स्थापना की जाएगी.
बिहार में जहां बीते कुछ सालों पहले सरकार की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बंद कर दिया गया था. हालांकि, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को चालू कर दिया गया है. वहीं, सहकारिता मंत्री ने बताया कि इस योजना का लाभ किसानों को रबी सीजन में लगने वाली फसलों की लागत के क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाएगा. किसानों को बहुत कम प्रीमियम राशि देनी होगी और प्रीमियम में राज्य और केंद्र सरकार भी अपना हिस्सा देंगें. आगे उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन में जो धान की खरीदारी हुई है, उस लक्ष्य के विरुद्ध राज्य खाद्य निगम को 24.57 लाख मीट्रिक टन यानी 98.47 प्रतिशत चावल की आपूर्ति की जा चुकी है.
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