SC का बड़ा फैसला: जमीन अधिग्रहण मुआवजे पर दावेदार किसानों को राहत, NHAI की कटौती पर रोक

SC का बड़ा फैसला: जमीन अधिग्रहण मुआवजे पर दावेदार किसानों को राहत, NHAI की कटौती पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े मामले में बड़ा फैसला देते हुए NHAI की याचिका को सीमित कर दिया है. कोर्ट ने साफ किया कि वित्तीय बोझ का हवाला देकर किसानों के मुआवजे में कटौती नहीं की जा सकती. हालांकि, केवल 28 मार्च 2015 तक लंबित मामलों में ही सोलेशियम और ब्याज का लाभ मिलेगा, जबकि पहले से निपटाए गए मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा.

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SC का बड़ा फैसला: जमीन अधिग्रहण मुआवजे पर दावेदार किसानों को राहत, NHAI की कटौती पर रोकभूमि अधिग्रहण मामले में किसानों को राहत

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय से मुआवजे के दावेदारों को राहत दी है. कोर्ट के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने उन किसानों को मुआवजा देने के पहले के फैसले की समीक्षा करने की मांग की थी, जिनकी जमीन 2013 से पहले अलग-अलग परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी. कोर्ट ने कहा कि सोलेशियम और ब्याज के अनुदान को वित्तीय बोझ की भयावहता पर आकस्मिक नहीं बनाया जा सकता है. उस आधार पर न्यायसंगत मुआवजे की संवैधानिक गारंटी को कमजोर नहीं किया जा सकता है.

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वित्तीय दायित्व बढ़ने का तर्क मुआवजा घटाने के लिए वैध आधार नहीं है. सरकार ने अदालत के समक्ष तर्क दिया था कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम में 2013 के संशोधन से पहले कम कीमतों पर अधिग्रहित भूमि की भारी मात्रा के कारण सोलेशियम और ब्याज के भुगतान के लिए वास्तविक दायित्व लगभग 29,000 करोड़ रुपये है.

सोलेशियम और ब्याज के हकदार

कोर्ट ने कहा, हमारा विचार है कि जबकि भूस्वामी कानून के मामले के रूप में सोलेशियम और ब्याज के हकदार हो सकते हैं, उन्हें अंतिम रूप वाले दावों को फिर से खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. भूस्वामियों के अधिकारों और मुकदमेबाजी में निश्चितता की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए. निपटाए गए दावों को अंतहीन रूप से फिर से खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

इसे देखते हुए, हम स्पष्ट करते हैं कि केवल वे भूस्वामी जिनके बढ़े हुए मुआवजे के दावे, सक्षम मंच के समक्ष 28 मार्च 2015 तक ब्याज लंबित था, वे निर्धारित कानून के संदर्भ में सोलेशियम और ब्याज का दावा करने के हकदार होंगे. ऐसे मामलों में, कानून के अनुसार उचित राहत दी जा सकती है. ऐसे मामलों में जहां बढ़ा हुआ मुआवजा दिया गया है, लेकिन सोलेशियम और ब्याज का मुद्दा विशेष रूप से दावा में शामिल नहीं था. लेकिन जिन लोगों ने मुआवजा लेकर अपना दावा मुकम्मल कर लिया है, इस आदेश के बाद उनका कोई दावा नहीं बनेगा.

NHAI की याचिका सीमित की

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 से पहले अधिग्रहित भूमि के लिए ब्याज और बढ़े हुए मुआवजे की समीक्षा के लिए भारतीय राष्ट्रीय प्राधिकरण की याचिका पर तरसेम सिंह के फैसले के दायरे को कम किया. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, 'भूमि अधिग्रहण के मुकदमे फिर से नहीं खोले जाएंगे. यानी सोलेशियम और ब्याज राशि अभी भी अदा करनी होगी.

केवल 28 मार्च 2015 की स्थिति के अनुसार लंबित मुआवजे के दावे और मामले ही इस आदेश से जुड़े लाभ के हकदार हैं. मुआवजा लेकर निपटाए जा चुके बंद मामलों को अब इस आदेश के आधार पर पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता है. सरकार का वित्तीय बोझ मुआवजे से इनकार करने का कोई आधार नहीं है.

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