खारी बावली बाजार में मेवों की ढुलाई करता एक ठेल वाला. कोरोना-लॉकडाउन की पाबंदियां झेलने के 2 साल बाद भीड़ की शक्ल देखने को मिली थी. देश की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट मार्केट खारी बावली, चांदनी चौक में चहल-पहल बढ़ी थी. दो महीने पहले सीजन भी शुरू हो गया था. सर्दी को देखते हुए काजू-बादाम, अखरोट-किशमिश की डिमांड बढ़ने की पूरी उम्मीद थी. लेकिन कोरोना की एक खबर से देखते ही देखते मार्केट की रौनक ही गायब हो गई. ग्राहकों की बढ़ती हुई भीड़ इक्का-दुक्का लोगों में बदल गई. खारी बावली ड्राई फ्रूट मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष इस दर्द को बयां करते हुए कहते हैं कि बड़ी मुश्किल से दो साल बाद तो बाजार की रंगत बदली थी.
देश में सिर्फ यूपी के हाथरस में बनने वाली हींग का बड़ा बाजार भी खारी बावली में शामिल हो गया है. हाथरस में बनने के बाद हींग खारी बावली आ रही है. यहां से रिटेल में और होलसेल के छोटे ऑर्डर पूरे किए जा रहे हैं. जबकि होलसेल के बड़े ऑर्डर लिए तो खारी बावली में जा रहे हैं, लेकिन माल हाथरस से सप्लाई होता है.
खारी बावली ड्राई फ्रूट मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव बत्रा ने किसान तक को बताया कि हमारी मार्केट देश की सबसे बड़ी सूखे मेवा और गरम मसालों की मार्केट है. कश्मीर ही नहीं अफगानिस्तान, ईरान समेत अमेरिका, चिली आदि देशों से ड्राई फ्रूट सीधे खारी बावली ही आते हैं. यहां से होलसेल में माल देश के दूसरे शहरों में सप्लाई होता है. यहां एक बड़ी मार्केट रिटेल की भी है. गरम मसाले भी यहां से होलसेल और रिटेल दोनों में ही बिकते हैं.
राजीव बत्रा ने बताया कि खारी बावली में लोग घर-परिवार में होने वाली शादी-पार्टी के लिए भी ड्राई फ्रूट खरीदने आते हैं. घरों में इस्तेमाल करने के लिए एक-दो किलो से लेकर चार-पांच किलो मेवा खरीदने वाले ग्राहकों की भीड़ भी खारी बावली आती है. रिटेल की दुकानों पर खुली और पैक्ड मेवा दोनों ही तरह से मिलती है. ऐसे ग्राहकों से भी दुकानदारों को बड़ी उम्मीद रहती है. लेकिन कोरोना की खबरों ने ऐसी भीड़ के कदम रोक दिए हैं.
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