सिंचाई परियोजना (सांकेतिक तस्वीर)मध्य प्रदेश सराकर ने मैहर और कटनी में सिंचाई प्रोजेक्ट और सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापिताें के लिए अहम फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें मैहर और कटनी जिलों की दो अहम सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. वहीं, सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित हजारों परिवारों को लंबे समय से चली आ रही रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्या से राहत देने का निर्णय लिया गया.
कैबिनेट ने मैहर और कटनी जिलों की दो सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 620 करोड़ 65 लाख रुपये की मंजूरी दी. इनमें मैहर और कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना के लिए 53 करोड़ 73 लाख रुपये मंजूर किए गए. इस परियोजना से लगभग 3,500 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा विकसित होगी. इससे दोनों जिलों के 9 गांवों के करीब 2,810 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और फसल उत्पादकता में वृद्धि की उम्मीद है.
इसके अलावा कटनी जिले की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना को 566 करोड़ 92 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई. यह परियोजना बरही और विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों को कवर करेगी. इसके पूरा होने पर लगभग 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और करीब 11,500 किसानों को लाभ मिलेगा. सरकार का आकलन है कि इस परियोजना से वर्षा पर निर्भरता घटेगी और क्षेत्र में खेती अधिक सुरक्षित और लाभकारी बनेगी.
इन फैसलों के साथ मंत्रि-परिषद ने 6 विभागों की 10 योजनाओं की निरंतरता के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति भी दी. साथ ही मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर उसके कर्मचारियों के महिला एवं बाल विकास विभाग में शामिल करने का निर्णय लिया गया.
इसके अलावा कैबिनेट ने नर्मदा घाटी की सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडों का पंजीयन नि:शुल्क कराए जाने को मंजूरी दी. इसके तहत रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टॉम्प ड्यूटी की राशि का खर्च नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण उठाएगा. सरकार के इस फैसले से 25,600 से अधिक विस्थापित परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा.
वर्षों से पंजीयन खर्च को लेकर परेशान इन परिवारों को अब बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपने भूखंडों का वैधानिक अधिकार मिल सकेगा. इस निर्णय से राज्य शासन पर करीब 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, लेकिन सरकार का कहना है कि यह पुनर्वास और सामाजिक न्याय की दिशा में जरूरी कदम है.
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