यूपी बना भूजल संरक्षण का मॉडल स्टेट (Photo-Kisan Tak)भारत, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश, अपनी बढ़ती जरूरतों के लिए जल संसाधनों, विशेषकर भूजल पर अत्यधिक निर्भर है. लेकिन जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मांग के कारण यह अदृश्य खजाना तेजी से खाली हो रहा है. केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की 2024 की रिपोर्ट एक गंभीर चेतावनी देती है. रिपोर्ट के अनुसार, देश के 102 जिले भूजल के 'अति-शोषित' Over-exploited श्रेणी में हैं, जिसका अर्थ है कि यहां जमीन से पानी की निकासी उसकी प्राकृतिक रिचार्ज दर से कहीं अधिक है. यह संकट राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में सबसे विकट है, जहां क्रमशः 29, 19 और 16 जिले अति-शोषित हैं. इसके अलावा, देश भर में 22 जिले 'गंभीर' और 69 जिले 'अर्ध-गंभीर' श्रेणी में हैं. कुल मिलाकर, ये 193 जिले भविष्य के बड़े जल संकट का संकेत दे रहे हैं.
सरकार का कहना है कि अगर हम इस खजाने से केवल निकालते रहेंगे और उसे फिर से भरने का प्रयास नहीं करेंगे, तो यह खाली हो जाएगा. इसी स्थिति का आकलन करने के लिए, केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और राज्य सरकारें मिलकर हर साल देश के भूजल संसाधनों का मूल्यांकन करती हैं. इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, जल शक्ति मंत्रालय ने 2019 में देश के 256 सर्वाधिक जल-संकट वाले जिलों में "जल शक्ति अभियान" (JSA) की शुरुआत की. इसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को एक "जन आंदोलन" बनाना था. 2021 में, प्रधानमंत्री ने इस अभियान को "जल शक्ति अभियान: कैच द रेन" के रूप में एक राष्ट्रव्यापी विस्तार दिया. इसकी टैगलाइन "कैच द रेन - व्हेयर इट फॉल्स, व्हेन इट फॉल्स" बारिश के पानी को पकड़ो, जहां भी गिरे, जब भी गिरे ने जल संरक्षण को हर नागरिक की जिम्मेदारी बनाने का संदेश दिया.
जल शक्ति मंत्रालय के "जल शक्ति अभियान: कैच द रेन" के तहत अब पानी बचाने के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल हो रहा है. इसका लक्ष्य जल संरक्षण के प्रयासों को पहले से कहीं ज़्यादा वैज्ञानिक और प्रभावी बनाना है. इस अभियान के अंतर्गत, देश के हर जल स्रोत, जैसे तालाब, झील और पोखर की गिनती की जा रही है और उन्हें जियो-टैग किया जा रहा है.
इस अभियान को वैज्ञानिक आधार देने के लिए आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है. डिजिटल मैपिंग के लिए सैटेलाइट और जीआईएस मैपिंग का उपयोग करके देश इससे हर जल स्रोत का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है, जिसके आधार पर 639 जिले वैज्ञानिक संरक्षण योजनाएं तैयार कर चुके हैं. इसके आलावी रियल-टाइम निगरानी के लिए देश भर में 5,260 से ज़्यादा डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं, जो ज़मीन के नीचे पानी के स्तर की जानकारी तुरंत ऑनलाइन भेजते हैं. यह डेटा एक वेब पोर्टल पर सभी के लिए उपलब्ध है. भूजल के आंकलन के लिए नासा-इसरो के निसार (NISAR) जैसे उन्नत सैटेलाइट मिशनों के साथ मिलकर भूजल में हो रहे बदलावों पर बड़े पैमाने पर नज़र रखी जा रही है.
जल संरक्षण अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक त्रि-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ केंद्रीय नोडल अधिकारियों और तकनीकी अधिकारियों की टीमें बनाई हैं. ये टीमें जिलों का दौरा कर प्रगति की समीक्षा करती हैं और चेक डैम बनाने, भूजल रिचार्ज करने और पानी के कुशल उपयोग जैसे विषयों पर व्यावहारिक तकनीकी सलाह देती हैं. राज्य स्तरीय समन्वय के लिए राज्यों द्वारा नियुक्त राज्य नोडल अधिकारी केंद्र और जिला प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं, जिससे योजनाओं का सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है. इस प्रकार, एक राष्ट्रव्यापी अभियान, आधुनिक तकनीक और एक सुदृढ़ ज़मीनी तंत्र के माध्यम से भारत अपने भूजल संकट का सामना करने और एक जल-सुरक्षित भविष्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है.
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