रबी फसलों की तैयारीदेश के कई राज्यों में धान की कटाई शुरू हो चुकी है. धान की कटाई के बाद किसानों को रबी सीजन की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए. क्योंकि रबी सीजन में की गई थोड़ी-सी लापरवाही आगे चलकर उत्पादन और कमाई दोनों पर असर डाल सकती है. गेहूं, चना, मसूर, सरसों और मटर जैसी फसलों से अच्छी पैदावार लेने के लिए जरूरी है कि किसान बुवाई से पहले ही खेत से लेकर बीज और खाद तक की पूरी तैयारी कर लें. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों को रबी फसलों की बेहतर पैदावार के लिए 7 जरूरी काम समय रहते पूरा करने की सलाह दी है, आइए जानते हैं, रबी की बुवाई से पहले किसानों को कौन-से 7 काम जरूर कर लेने चाहिए.
1. सबसे पहले कराएं मिट्टी की जांच: रबी फसल की तैयारी में सबसे पहला काम मिट्टी की जांच का होना चाहिए. मिट्टी की उर्वरता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी के आधार पर ही खाद और उर्वरक की योजना बनानी चाहिए. मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है, यह पता होने पर किसान जरूरत के मुताबिक खाद और उर्वरक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे अनावश्यक खाद डालने से बचा जा सकता है और फसल को जरूरी पोषण भी मिलता है. कृषि विभाग के मुताबिक, मिट्टी की सही जांच और उसके आधार पर पोषण प्रबंधन करने से फसल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है.
2. अच्छी क्वालिटी वाले बीज का करें चयन: रबी सीजन में बेहतर उत्पादन के लिए प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. किसान अपनी जमीन, क्षेत्र और सिंचाई की उपलब्धता के हिसाब से फसल की उपयुक्त किस्म का चुनाव करें. बीज खरीदते समय उसकी क्वालिटी, किस्म और प्रमाणिकता की जांच जरूर करनी चाहिए. खराब या कम क्वालिटी वाले बीज से अंकुरण कमजोर हो सकता है और इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ सकता है.
3. बुवाई से पहले करें बीज उपचार: सिर्फ अच्छे बीज का चयन करना ही पर्याप्त नहीं है. बुवाई से पहले बीज का उचित उपचार भी करना चाहिए. इससे बीज और शुरुआती फसल को कई तरह के रोगों से बचाने में मदद मिलती है. बीज उपचार करने से अंकुरण बेहतर हो सकता है और शुरुआती अवस्था में फसल के स्वस्थ विकास की संभावना बढ़ती है. किसान संबंधित फसल के लिए कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उचित बीज उपचार विधि अपनाएं.
4. समय से पहले खेत की तैयारी पूरी करें: धान की कटाई के बाद रबी फसल की बुवाई के लिए खेत को तैयार करने में देरी नहीं करनी चाहिए. समतलीकरण और जुताई के बाद खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है. खेत समतल होने से सिंचाई के दौरान पानी का वितरण बेहतर रहता है. साथ ही बुवाई के समय भी सुविधा होती है, इसलिए किसान धान की कटाई के बाद खेत को खाली छोड़ने के बजाय रबी फसल के अनुसार उसकी तैयारी शुरू कर दें.
5. सिंचाई की व्यवस्था पहले से रखें: रबी फसलों में समय पर सिंचाई उत्पादन के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है, इसलिए किसान जल स्रोतों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित करें. खासकर जिन क्षेत्रों में बारिश पर निर्भरता कम है, वहां खेत में सिंचाई के साधन और पानी की उपलब्धता की योजना पहले बना लेनी चाहिए. फसल की जरूरत के अनुसार समय पर सिंचाई करने से पौधों की बढ़वार और दाने बनने की प्रक्रिया बेहतर रहती है.
6. खाद और उर्वरक का इंतजाम अभी करें: रबी फसलों की बुवाई के समय खाद और उर्वरक की कमी न हो, इसके लिए किसानों को जरूरी खाद और उर्वरकों का समय पर भंडारण कर लेना चाहिए. हालांकि, किसान बिना जरूरत के अधिक मात्रा में उर्वरक जमा करने के बजाय फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही इसकी व्यवस्था करें. मिट्टी की जांच के आधार पर तैयार की गई उर्वरक योजना से सही मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद मिलती है. साथ ही किसानों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठाना चाहिए.
7. कृषि विभाग की सलाह और योजनाओं की जानकारी लेते रहें: रबी सीजन के दौरान किसानों को कृषि विभाग की ओर से जारी होने वाली सलाह और योजनाओं की जानकारी लेते रहना चाहिए. फसल की किस्म, बुवाई का समय, बीज उपचार, खाद-उर्वरक और सिंचाई से जुड़ी जानकारी के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा. किसान कृषि विभाग की योजनाओं और कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह का नियमित रूप से लाभ ले सकते हैं. इससे मौसम और फसल की स्थिति के अनुसार खेती में जरूरी बदलाव करने में मदद मिलेगी.
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