ओडिशा के इस जिले में खनन से बढ़ी किसानों की मुश्किल, खेत और जलस्रोत बर्बाद होने का लगाया आरोप

ओडिशा के इस जिले में खनन से बढ़ी किसानों की मुश्किल, खेत और जलस्रोत बर्बाद होने का लगाया आरोप

ओडिशा के मयूरभंज में खनन गतिविधियों को लेकर किसानों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. किसानों का आरोप है कि रेत और खनन मलबे से खेत और जलस्रोत प्रभावित हुए हैं.

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ओडिशा के इस जिले में खनन से बढ़ी किसानों की मुश्किल, खेत और जलस्रोत बर्बाद होने का लगाया आरोपखनन से बढ़ी किसानों मुश्किल (फोटो- ANI)

ओडिशा के मयूरभंज जिले में खनन गतिविधियों को लेकर स्थानीय किसानों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. आरोप है कि लंबे समय से जारी खनन के कारण खेती, जल स्रोत और आसपास का प्राकृतिक तंत्र प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर इलाके की जमीन और आजीविका पर असर पड़ा है. स्थानीय किसान सिंहराज हेम्ब्रम ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में काम कर रही खनन कंपनी ने वर्षों के दौरान प्राकृतिक जलधाराओं को रेत और खनन अवशेषों से भर दिया है.

सिंहराज ने कहा कि करीब 55 वर्षों से गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अपेक्षित विकास नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि खेतों तक पानी पहुंचना मुश्किल हो गया है और कई जगहों पर इतनी रेत और गिट्टी जमा हो गई है कि खेतों में जाना भी कठिन हो गया है.

'बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई'

सिंहराज हेम्ब्रम ने कहा कि ग्रामीण हर साल अपनी समस्याएं प्रशासन और कंपनी के सामने रखते रहे हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. उनका कहना है कि खेती प्रभावित होने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कई किसानों के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खनन अपशिष्ट के कथित अवैध निस्तारण को लेकर लिखित शिकायतें भी दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी.

प्रशासन ने जांच और सुनवाई का दिया भरोसा

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मयूरभंज के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नेत्रानंद मलिक ने कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे की जानकारी मिली है और शिकायतों की समीक्षा की जाएगी. उन्होंने बताया कि कुछ लोगों की ओर से आवेदन पहले ही दिए जा चुके हैं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनवाई कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस मामले पर आगे चर्चा कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा.

पर्यावरण विशेषज्ञ ने नियमों के पालन पर उठाए सवाल

वहीं, पूर्व मानद वन्यजीव संरक्षक और पर्यावरणविद वनोमित्र आचार्य ने कहा कि विकास के लिए खनन जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए तय नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने आरोप लगाया कि मिट्टी और खनन अवशेषों के अनुचित प्रबंधन से बारिश के दौरान बहाव बढ़ता है, जिससे कृषि भूमि प्रभावित होती है.

सिमिलिपाल क्षेत्र पर भी असर की आशंका

वनोमित्र आचार्य ने कहा कि खनन से उठने वाली धूल और अपशिष्ट आसपास के पर्यावरण और वन्यजीवों पर भी असर डाल सकते हैं. सिमिलिपाल के आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता और प्राकृतिक आवास पर दबाव बढ़ने की आशंका है. अब प्रशासन की प्रस्तावित जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी. (एएनआई)

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