खाद (सांकेतिक तस्वीर)इंदौर में चल रही ब्रिक्स (BRICS) एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप बैठक के दौरान सदस्य देशों से पहुंचे प्रतिनिधियों को शहर की उस ऐतिहासिक कृषि विरासत से परिचित कराया गया, जिसने इंदौर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. अधिकारियों ने बताया कि बैठक में खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों और कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है. बैठक के बीच इथियोपिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया समेत BRICS देशों के प्रतिनिधियों को ऐतिहासिक राजवाड़ा महल का भ्रमण कराया गया. इस दौरान प्रशासन ने उन्हें ‘इंदौर कंपोस्ट’ पद्धति की जानकारी दी. यह जैविक खाद तैयार करने की ऐसी तकनीक है, जिसे बाद में दुनिया के कई देशों ने अपनाया.
अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक जैविक खेती के जनक माने जाने वाले ब्रिटिश कृषि वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉवर्ड ने 20वीं सदी के शुरुआती दशकों में इंदौर की पारंपरिक खेती पद्धतियों का अध्ययन किया था. उन्होंने किसानों को कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक पदार्थों से खाद तैयार करते देखा. इसी अध्ययन के आधार पर उन्होंने एक व्यवस्थित कंपोस्टिंग तकनीक विकसित की, जो आगे चलकर ‘इंदौर मेथड ऑफ कंपोस्ट मेकिंग’ के नाम से प्रसिद्ध हुई.
इतिहासकार जफर अंसारी के अनुसार, इंदौर का गवर्नमेंट एग्रीकल्चर कॉलेज पहले वर्ष 1923 में इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट इंडस्ट्री के रूप में स्थापित किया गया था. अल्बर्ट हॉवर्ड ने इसी संस्थान में अपने अध्ययन और प्रयोग किए थे. उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1935 में इंदौर यात्रा के दौरान इस कंपोस्ट पद्धति की सराहना की थी.
स्थानीय संसाधनों पर आधारित यह तरीका आज भी मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिहाज से प्रभावी माना जाता है. BRICS कृषि कार्य समूह कार्यक्रम के तहत विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को एक ग्रामीण हाट केंद्र भी ले जाया गया. यहां उन्हें मध्य प्रदेश की कृषि विविधता, प्राकृतिक खेती, एग्रो प्रोसेसिंग और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी गई.
प्रतिनिधियों ने बुरहानपुर के केले से बने वैल्यू एडेड उत्पाद, बालाघाट के GI टैग वाले चिन्नौर चावल और रीवा के GI टैग वाले सुंदरजा आम समेत कई स्थानीय कृषि उत्पादों के बारे में जानकारी ली. इसके अलावा झाबुआ की पारंपरिक फसलें, मंडला में संरक्षित ‘श्री अन्न’ की दुर्लभ किस्में, नीमच की औषधीय फसलें और प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पाद भी उनके आकर्षण का केंद्र रहे. भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप की बैठक 11 जून तक जारी रहेगी. BRICS समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं.
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