कम हुआ मोटे अनाज का रकबादेश में मोटे अनाज यानी श्री अन्न की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इसके बावजूद 2026 में इन फसलों के कुल खेती क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है. जारी आंकड़ों के मुताबिक, ज्वार, बाजरा, रागी, छोटे मिलेट्स और मक्का समेत प्रमुख मोटे अनाज की खेती का कुल क्षेत्र 2025 के मुकाबले घटा है. इससे साफ है कि इस साल किसानों ने इन फसलों की खेती के लिए पहले की तुलना में कम जमीन का इस्तेमाल किया है.
आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच श्री अन्न और मोटे अनाज का सामान्य खेती क्षेत्र 182.63 लाख हेक्टेयर था. साल 2025 में इन फसलों का अंतिम क्षेत्रफल बढ़कर 192.12 लाख हेक्टेयर पहुंच गया था. लेकिन 2026 में यह घटकर 187.41 लाख हेक्टेयर के आसपास रह गया.
इस तरह 2025 की तुलना में 2026 में कुल क्षेत्रफल में करीब 4.71 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. यानी पिछले साल के मुकाबले किसानों ने इस साल मोटे अनाज की खेती कम क्षेत्र में की है. हालांकि, अगर सामान्य क्षेत्रफल से तुलना करें तो 2026 का रकबा अभी भी सामान्य स्तर से ज्यादा है.
ज्वार की बात करें तो इसमें दूसरे कई मोटे अनाज के मुकाबले स्थिति थोड़ी अलग रही. 2020-21 से 2024-25 के बीच ज्वार का सामान्य क्षेत्र 14.44 लाख हेक्टेयर था. 2025 में इसका क्षेत्रफल 12.10 लाख हेक्टेयर रहा था.
2026 में ज्वार की बुवाई करीब 12.82 लाख हेक्टेयर में हुई है. यानी 2025 के मुकाबले ज्वार का रकबा करीब 0.72 लाख हेक्टेयर बढ़ा है. इसका मतलब है कि इस साल कुछ किसानों ने ज्वार की खेती की ओर दोबारा रुख किया है. हालांकि, इसका क्षेत्र अभी भी पिछले कुछ वर्षों के सामान्य क्षेत्र से कम है.
बाजरा देश के प्रमुख मोटे अनाजों में शामिल है और खासकर कम पानी वाले इलाकों के किसानों के लिए यह महत्वपूर्ण फसल है. आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच बाजरा का सामान्य क्षेत्र 70.94 लाख हेक्टेयर था. 2025 में इसकी खेती 63.80 लाख हेक्टेयर में हुई थी.
2026 में बाजरा का क्षेत्र घटकर 62.44 लाख हेक्टेयर रह गया. इस तरह पिछले साल की तुलना में बाजरा की खेती करीब 1.36 लाख हेक्टेयर कम हुई है. कम क्षेत्र में बुवाई होने का मतलब है कि इस साल किसानों ने दूसरी फसलों को भी प्राथमिकता दी है.
रागी को पोषण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मोटा अनाज माना जाता है. इसमें कैल्शियम और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच रागी का सामान्य क्षेत्र 12.01 लाख हेक्टेयर था.
2025 में रागी की खेती का क्षेत्र 13.46 लाख हेक्टेयर रहा था, लेकिन 2026 में यह घटकर करीब 12.80 लाख हेक्टेयर रह गया. यानी 2025 की तुलना में रागी के क्षेत्र में करीब 0.66 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. हालांकि, रागी का क्षेत्र अभी भी पिछले वर्षों के सामान्य क्षेत्र से अधिक है.
छोटे मिलेट्स में कई तरह के छोटे अनाज शामिल होते हैं, जिन्हें सेहत के लिए काफी उपयोगी माना जाता है. इनकी मांग भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. इसके बावजूद 2026 में इनकी खेती का क्षेत्र घटा है.
आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच छोटे मिलेट्स का सामान्य क्षेत्र 4.47 लाख हेक्टेयर था. 2025 में इनकी खेती 4.15 लाख हेक्टेयर में हुई थी. 2026 में यह घटकर करीब 3.30 लाख हेक्टेयर रह गई. यानी पिछले साल के मुकाबले करीब 0.85 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.
मोटे अनाज की सूची में मक्का का क्षेत्र सबसे ज्यादा है. 2020-21 से 2024-25 के बीच मक्का का सामान्य क्षेत्र 80.77 लाख हेक्टेयर था. 2025 में यह बढ़कर 98.61 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था.
लेकिन 2026 में मक्का का क्षेत्र घटकर 87.15 लाख हेक्टेयर रह गया. यानी 2025 की तुलना में मक्का की खेती करीब 11.46 लाख हेक्टेयर कम हुई है. हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी पिछले वर्षों के सामान्य क्षेत्र से अधिक है.
मोटे अनाज की खेती का क्षेत्र घटने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल फसल से मिलने वाली कमाई का होता है. अगर किसी दूसरी फसल में ज्यादा और निश्चित आमदनी दिखाई देती है तो किसान अपनी जमीन उस फसल में लगा सकते हैं.
इसके अलावा मौसम, बारिश की स्थिति, सिंचाई की सुविधा, बाजार में मांग और फसल की कीमत भी बुवाई के फैसले को प्रभावित करते हैं. किसी इलाके में अगर समय पर बारिश नहीं होती है या बाजार में फसल का अच्छा भाव नहीं मिलता है तो किसान अगली बार उस फसल का क्षेत्र कम कर सकते हैं.
ऐसे में 2026 में खेती के क्षेत्र में आई कमी एक इशारा है. किसानों को अगर इन फसलों की अच्छी कीमत, बाजार की सुविधा और खरीद की बेहतर व्यवस्था मिलती है, तो आने वाले समय में इनका रकबा फिर बढ़ सकता है. अभी के आंकड़े यही बताते हैं कि 2025 की बड़ी बढ़ोतरी के बाद 2026 में मोटे अनाज की खेती कुछ पीछे आई है, लेकिन कई फसलें अभी भी अपने सामान्य क्षेत्र से ऊपर बनी हुई हैं.
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