गेहूं पर हीट स्ट्रेट का बढ़ा खतरावाराणसी और आसपास के इलाकों में मार्च के महीने में ही गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया है. तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से गेहूं की फसल पर संकट मंडराने लगा है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस समय सावधानी नहीं बरती गई, तो गेहूं के दाने कमजोर रह जाएंगे, जिससे पैदावार में 15 से 25 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल की सुरक्षा के लिए हर 20 दिन में हल्की सिंचाई करते रहें.
आईसार्क (ISARC) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह के अनुसार, गेहूं की पैदावार काफी हद तक बुआई के समय पर निर्भर करती है. जो फसल नवंबर के पहले पखवाड़े यानी 15 नवंबर तक में बोई गई थी, उसमें दाने लगभग बन चुके हैं, इसलिए उन पर गर्मी का असर कम होगा. लेकिन जिन किसानों ने 20 नवंबर के बाद बुआई की है, उनकी फसल अभी 'दूधिया अवस्था' में है. यह समय दाने के विकास के लिए बहुत संवेदनशील होता है और अधिक गर्मी दाने को समय से पहले सुखाकर सिकोड़ सकती है.
बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने सिंचाई के कुछ खास तरीके बताए हैं. किसानों को सलाह दी गई है कि वे रात के समय सिंचाई करें. रात में सिंचाई करने से खेत की मिट्टी लंबे समय तक ठंडी रहती है और नमी बनी रहती है. साथ ही, दिन में चलने वाली तेज हवाओं के दौरान सिंचाई करने से बचना चाहिए, क्योंकि गीली मिट्टी होने के कारण तेज हवा से फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे काफी नुकसान हो सकता है.
मार्च और अप्रैल के महीने गेहूं के दानों के वजन और आकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से फसल के आसपास का वातावरण (Micro-climate) ठंडा रहता है. यह ठंडक दानों को धीरे-धीरे और पूरी तरह पकने में मदद करती है. यदि खेत सूखा रहेगा, तो गर्मी के कारण फसल समय से पहले पक जाएगी (Forced Maturity), जिससे दाना छोटा और हल्का रह जाएगा. इसलिए दानों के अच्छे विकास के लिए खेत में हल्की नमी बनाए रखना अनिवार्य है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब हर साल मार्च में गर्मी बढ़ रही है. ऐसे में किसानों को अब 'क्लाइमेट स्मार्ट' खेती की ओर बढ़ना होगा. समय पर बुआई और सिंचाई के आधुनिक प्रबंधन से ही नुकसान को कम किया जा सकता है. किसानों को चाहिए कि वे अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र से संपर्क में रहें और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार ही सिंचाई का निर्णय लें. सही समय पर किया गया छोटा सा प्रयास आपकी साल भर की मेहनत और मुनाफे को बचा सकता है.
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