El Nino और युद्धों से तेज हुई खाद्य संकट की आहट, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताई चिंता, खाद सप्‍लाई पर भी खतरा

El Nino और युद्धों से तेज हुई खाद्य संकट की आहट, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताई चिंता, खाद सप्‍लाई पर भी खतरा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन और ईरान-खाड़ी संघर्षों से ग्लोबल साउथ पर ऊर्जा, खाद और वित्तीय दबाव बढ़ा है. प्रमुख अनाज निर्यातकों और उर्वरक उत्पादक देशों में जारी संकट से वैश्विक खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

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El Nino और युद्धों से तेज हुई खाद्य संकट की आहट, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जताई चिंता, खाद सप्‍लाई पर भी खतराविदेश मंत्री एस जयशंकर ने खाद्य संकट की आशंका जताई (फोटो/X@DrSJaishankar)

अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों के बीच दुनिया में अनाज और खाद की सप्लाई पर बढ़ते दबाव ने आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की आशंका बढ़ा दी है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि यूक्रेन और ईरान-खाड़ी क्षेत्र के संघर्षों से अनाज निर्यात और उर्वरक उत्पादन प्रभावित हो रहा है. इसके साथ ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय दबाव भी बढ़ रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौती गंभीर हो गई है.

अल नीनो के बीच खाद्य सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

एस जयशंकर ने एशिया सोसाइटी की ओर से आयोजित एक चर्चा में वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जलवायु संबंधी परिस्थितियों, अनाज की सप्‍लाई में संभावित बाधा और उर्वरक संकट का असर आने वाले महीनों में खाद्य उपलब्धता पर पड़ सकता है. उन्होंने सुपर अल नीनो जैसी परिस्थितियों का भी जिक्र किया.

विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर का सामना कर रही है, जहां कुछ बड़े अनाज निर्यातक देश अपनी खेप दूसरे देशों तक नहीं पहुंचा पाएंगे. उन्होंने खास तौर पर ब्लैक सी के रास्ते होने वाले अनाज निर्यात को लेकर चिंता जताई. संघर्षों के कारण आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में खाद्य बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.

रूस और पश्चिम एशिया में उर्वरक उत्पादन प्रभावित

एस जयशंकर ने वैश्विक खाद सप्‍लाई को भी बड़ी चिंता बताया. उन्होंने कहा कि उर्वरक उत्पादन में रूस और पश्चिम एशिया की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इन क्षेत्रों में जारी संघर्षों का उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ा है. अनाज आपूर्ति में संभावित रुकावट के साथ उर्वरक संकट कृषि उत्पादन की लागत और उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है.

विदेश मंत्री ने कहा कि खाद्य और उर्वरक संकट के साथ ऊर्जा की स्थिति भी चिंता का विषय है. तेल बाजार पहले से काफी तंग है और आपूर्ति से जुड़े राजनीतिक फैसले बाजार में और जटिलता पैदा कर सकते हैं. इससे कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

तेल की सप्लाई और राजनीति का असर

एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में तेल आपूर्ति की सुरक्षा और तेल की राजनीति दोनों एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं. इससे पहले से मौजूद ऊर्जा संकट और गंभीर हो सकता है. ऊर्जा की ऊंची कीमतों का असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है, जो अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं.

ग्लोबल साउथ पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव

एस जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन और ईरान-खाड़ी संघर्षों ने ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर डाला है. उन्होंने मौजूदा स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बताया. ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक से जुड़े संकट एक साथ आने पर विकासशील देशों के सामने आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है.

संघर्षों के बीच पूंजी प्रवाह भी चुनौती

विदेश मंत्री ने वित्तीय दबाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब दुनिया में संघर्ष बढ़ते हैं तो पूंजी अक्सर ग्लोबल साउथ से निकलकर सुरक्षित माने जाने वाले बाजारों की ओर चली जाती है. इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्तीय दबाव बढ़ता है और उनके सामने जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती और गंभीर हो जाती है.

वैश्विक फैसलों में दूसरे देशों के हितों का ध्यान जरूरी

एस जयशंकर ने कहा कि देशों को अपने फैसलों के व्यापक असर को ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि किसी फैसले का उद्देश्य दूसरे देशों के लिए मुश्किल पैदा करना नहीं था. बड़ी संख्या में देशों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित न हों, इसके लिए वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक सोच के साथ फैसले लेने की जरूरत है.

आने वाले महीनों को लेकर चिंता

एस जयशंकर ने कहा कि अगर ऊर्जा संकट के साथ खाद्य और उर्वरक संकट भी बढ़ता है और वित्तीय दबाव बना रहता है तो ग्लोबल साउथ के लिए स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है. उन्होंने इन परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की आशंका जताई.

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