कानपुर नगर के इटरा गांव पहुंचा किसान कारवांकानपुर नगर के इटरा गांव में किसान तक का किसान कारवां पहुंचा. कानपुर को भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है. जब यह किसान कारवां इटरा गांव पहुंचा तो किसानों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी. यह किसान कारवां उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के साझा प्रयास से चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य प्रदेश के 75 जिलों में किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाना है. इटरा गांव में यह कारवां अपने 16वें पड़ाव पर पहुंचा.
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की नई और आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया. किसानों को उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक के प्रयोग और आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे ड्रोन, सीड ड्रिल और हैप्पी सीडर के उपयोग की जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने समझाया कि वैज्ञानिक खेती करने से फसल का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है.
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने भाग लिया. किसानों ने वैज्ञानिकों से सीधे सवाल पूछे और अपनी खेती से जुड़ी समस्याएं बताईं. वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का समाधान भी बताया. किसानों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम खेती को लाभकारी बनाने में बहुत मददगार साबित हो रहे हैं.
किसान कारवां के पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र औरैया के वैज्ञानिक डॉ. आईपी सिंह ने किसानों को खेती में विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय बहुफसली खेती अपनाने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी. इससे पोषण स्तर में भी सुधार होगा. उन्होंने उन्नत सब्जी किस्मों की जानकारी भी दी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र कानपुर देहात के मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया. उन्होंने किसानों को रोटावेटर, जीरो टिलेज खेती और हरी खाद के प्रयोग की सलाह दी. साथ ही उन्होंने गर्मियों में गोबर की खाद के उपयोग से मृदा की गुणवत्ता और जीवांश बढ़ाने की बात कही.
तीसरे चरण में इफको के रीजनल मैनेजर भास्कर शुक्ला ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के प्रयोग की विधि किसानों को समझाई. उन्होंने बताया कि पारंपरिक यूरिया की तुलना में नैनो यूरिया अधिक प्रभावी, सस्ता और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि एक बोतल नैनो यूरिया एक बोरी यूरिया के बराबर काम करती है. नैनो डीएपी बीज अंकुरण और उत्पादन बढ़ाने में सहायक है.
चौथे चरण में पशुपालन विभाग के डिप्टी सीवीओ कमलेश कुमार ने नंदनी योजना, गोकुल मिशन और सहभागिता योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सहभागिता योजना के तहत गौशाला से गाय लेने पर सरकार किसानों को प्रति पशु ₹50 प्रतिदिन की सहायता सीधे बैंक खाते में देती है.
पांचवें चरण में इफको एमसी के प्रयागराज डिवीजन के सीनियर टेरिटरी बिजनेस मैनेजर अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2015 में इफको एमसी की शुरुआत हुई थी. उन्होंने कहा कि आज कंपनी के पास 85 से अधिक उत्पाद हैं. ये सभी उत्पाद एमआरपी पर उपलब्ध हैं. किसानों को 15 हजार रुपये की खरीद पर एक लाख रुपये का बीमा भी दिया जाता है.
छठे चरण में कृषि विभाग के डॉ. उमाशंकर यादव ने पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगाने की प्रक्रिया किसानों को बताई. इसके साथ ही उन्होंने बीज अनुदान और कृषि यंत्रीकरण योजनाओं की जानकारी भी दी.
सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र कानपुर देहात की डॉ. निमिषा अवस्थी ने अधिक मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग से होने वाले नुकसान बताए. उन्होंने बताया कि इससे मिट्टी का तापमान बढ़ रहा है और मिट्टी की उर्वरता घट रही है. उन्होंने फसल अवशेष जलाने के बजाय सड़ाने और जैविक पदार्थ बढ़ाने पर जोर दिया.
आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र औरैया के वैज्ञानिक डॉ. राम पलट ने चूहा और दीमक नियंत्रण के घरेलू उपाय किसानों को बताए. किसानों ने इन उपायों को ध्यान से सुना और समझा.
नवें चरण में जादूगर सलमान ने रोचक अंदाज में किसानों को समझाया कि केवल देखा-देखी में खाद और यूरिया का प्रयोग करना नुकसानदायक है. उन्होंने बताया कि पशुपालन खेती का आधार है और किसानों को इसे जरूर अपनाना चाहिए.
कार्यक्रम के दसवें चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार वितरित किए गए. प्रथम पुरस्कार महिला किसान रीमा को ₹3000 और द्वितीय पुरस्कार किसान राकेश को ₹2000 प्रदान किया गया.
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