चीनी उत्पादन में उछालभारत में गन्ने की पेराई का सीजन अब अपने आखिरी दौर में पहुंच रहा है. इसे “पेनल्टिमेट फेज” यानी अंतिम से पहले का चरण कहा जाता है. इस समय देश में चीनी की उपलब्धता अच्छी बनी हुई है, जिससे आम लोगों को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. 15 मार्च 2026 तक देश में कुल 262.14 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जो पिछले साल के इसी समय के मुकाबले ज्यादा है. पिछले साल इसी तारीख तक 237.24 लाख टन चीनी बनी थी. इसका मतलब है कि इस साल लगभग 10.5% ज्यादा उत्पादन हुआ है.
अगर राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में इस साल 81.3 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो लगभग पिछले साल के बराबर है. वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. महाराष्ट्र में 98.46 लाख टन और कर्नाटक में 46.04 लाख टन चीनी बनाई गई है. पिछले साल इन दोनों राज्यों में यह आंकड़े कम थे. इससे साफ पता चलता है कि इन राज्यों में इस बार गन्ने की खेती और उत्पादन बेहतर रहा है.
इस समय देश में कुल 157 चीनी मिलें चल रही हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 182 मिलें काम कर रही थीं. इसका मतलब है कि कुछ मिलें इस साल जल्दी बंद हो गई हैं या उनका काम पूरा हो चुका है. उत्तर प्रदेश में अभी 78 मिलें चल रही हैं, जबकि पिछले साल 83 मिलें चालू थीं. महाराष्ट्र और कर्नाटक में मिलों की संख्या भी थोड़ी कम हुई है. हालांकि, कर्नाटक के दक्षिणी हिस्से में कुछ मिलें जून से सितंबर 2026 के बीच फिर से शुरू हो सकती हैं.
अगर आसान भाषा में समझें, तो भारत में इस साल ज्यादा चीनी बनी है, जिससे बाजार में चीनी की कमी नहीं होगी. ज्यादा उत्पादन होने का मतलब है कि लोगों को चीनी आसानी से मिलती रहेगी और कीमतों में भी ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी.
हालांकि उत्पादन अच्छा है, लेकिन चीनी मिलों को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मिलों की लागत बढ़ गई है, यानी उन्हें चीनी बनाने में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. लेकिन उन्हें चीनी बेचने पर उतना पैसा नहीं मिल रहा. इसी कारण मिलों के पास पैसे की कमी हो रही है और वे किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं कर पा रही हैं.
महाराष्ट्र में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. 28 फरवरी 2026 तक वहां किसानों का करीब 4,898 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह रकम 2,949 करोड़ रुपये थी. यानी इस साल किसानों का बकाया काफी बढ़ गया है, जो चिंता की बात है.
चीनी उद्योग अब सरकार से मांग कर रहा है कि चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) को बढ़ाया जाए. MSP बढ़ने से मिलों को ज्यादा पैसा मिलेगा, जिससे वे किसानों को जल्दी भुगतान कर सकेंगी. इससे मिलों की हालत भी सुधरेगी और बाजार में संतुलन बना रहेगा. कुल मिलाकर, इस साल भारत में चीनी का उत्पादन अच्छा रहा है और लोगों को चीनी की कमी नहीं होगी. लेकिन मिलों की आर्थिक स्थिति और किसानों का बकाया भुगतान एक बड़ी चुनौती है. अगर सरकार समय पर सही कदम उठाती है, तो यह समस्या जल्दी हल हो सकती है और सभी को इसका फायदा मिलेगा.
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