उत्तर प्रदेश में किसान तक का 43वां पड़ाव, गोंडा में किसानों को मिली फसल और पशुपालन से जुड़ी जानकारी

उत्तर प्रदेश में किसान तक का 43वां पड़ाव, गोंडा में किसानों को मिली फसल और पशुपालन से जुड़ी जानकारी

गोंडा जिले के महेवा नानकर गांव में ‘किसान तक’ का 43वां पड़ाव आयोजित हुआ. किसानों को खेती-बाड़ी, पशुपालन, सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई. मछली पालन, फसल प्रबंधन और उर्वरक के सही इस्तेमाल पर विशेष मार्गदर्शन हुआ. कार्यक्रम ने किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने में मदद की.

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उत्तर प्रदेश में किसान तक का 43वां पड़ाव, गोंडा में किसानों को मिली फसल और पशुपालन से जुड़ी जानकारीगोंडा में हुआ किसान कारवां का आयोजन

किसान तक का किसान कारवां गोंडा ज़िले के महेवा नानकर गांव पहुंचा, जो सरयू और घाघरा नदियों के किनारे बसा है. यह इस विशेष अभियान की कवरेज का 43वां पड़ाव था. यह उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की एक संयुक्त पहल है-जो इस समय राज्य के सभी 75 ज़िलों में चल रही है. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया, जहां उन्हें खेती-बाड़ी से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलीं. कार्यक्रम के दौरान, कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती से जुड़ी अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बारे में बताया और उनसे आग्रह किया कि वे खेती और पशुपालन, दोनों क्षेत्रों से जुड़ी योजनाओं का लाभ उठाएं. इसके साथ ही, पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशुधन क्षेत्र के लिए सरकार की बेहद फायदेमंद योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इस मौके पर, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया; उन्होंने समझाया कि नई तकनीकों को अपनाकर किसान कैसे अपनी उत्पादन क्षमता और आमदनी, दोनों को एक साथ बढ़ा सकते हैं, और साथ ही खेती में आने वाले खर्च को भी कम कर सकते हैं.

पशुपालन और सरकारी योजनाओं की मिली जानकारी

गोंडा- जो दालों के उत्पादन में सबसे आगे रहने वाला ज़िला है- में किसानों को न केवल कृषि और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं और खेती की आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई, बल्कि उन्हें धनुका और चंबल फर्टिलाइजर्स जैसी जानी-मानी कंपनियों के प्रतिनिधियों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के सही इस्तेमाल के बारे में मार्गदर्शन भी मिला. इसके अलावा, टायर बनाने के क्षेत्र की एक अग्रणी कंपनी- JK Tyre के प्रतिनिधियों ने किसानों के साथ खेती की मशीनों में इस्तेमाल होने वाले टायरों के बारे में ज़रूरी जानकारी साझा की. साथ ही, इस कार्यक्रम के दौरान एक लकी ड्रॉ के ज़रिए 18 किसानों को नकद इनाम भी दिए गए.

खेती के साथ मछली पालन से किसान बढ़ा सकते हैं आमदनी

पहले चरण में, कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानदीप गुप्ता ने बताया कि किसान मछली पालन पर ध्यान केंद्रित करके अपनी आय में काफी वृद्धि कर सकते हैं; इस उद्देश्य से, सरकार इस क्षेत्र को सहायता देने के लिए विभिन्न योजनाएँ और सब्सिडी प्रदान कर रही है. सरकार ने मछली पालन की गतिविधियों के लिए 40% से 60% तक की सब्सिडी का प्रावधान किया है. इसके अलावा, सरकार मछली के चारे के निर्माण की इकाइयाँ स्थापित करने के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है.

गन्ना की फसल से मोथा खत्म करने के लिए करें इसका उपयोग

दूसरे चरण में धानुका के प्रतिनिधि प्रद्युम्न मिश्रा ने कहा कि धानुका पिछले 50 सालों से कृषि में रसायन से जुड़े उत्पादों को बनाने का काम कर रही है.वहीं मीठे पानी को बचाने के लिए भी धानुका पिछले 5 सालों से काम कर रही है कि कैसे पानी को बचाया जाए. उन्होंने कहा कि गन्ने में मोथा खरपतवार के निस्तारण को लेकर ‘सेमप्रा’ उत्पाद के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गन्ना के खेत से मोथा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

चंबल फर्टिलाइजर के उत्पादों से बढ़ेगी आय

तीसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि बृजेंद्र कुमार यादव ने ‘उत्तम प्रणाम’ और ‘उत्तम सुपरराइजा’ उत्पादों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये दोनों जैव-उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं तथा इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वराशक्ति भी बनी रहती है. ये उत्पाद रसायन-मुक्त हैं और खेत की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते.इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चंबल फर्टिलाइजर की ओर से मिट्टी की जांच निशुल्क कराई जाती है.अतः किसान अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं, क्योंकि वर्तमान समय में मिट्टी की जांच अत्यंत आवश्यक है.

कला के जरिए खेती का संदेश

चौथे चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की.उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने वर्मी कंपोस्ट और स्वयं सहायता समूह जैसे विषयों पर भी किसानों के बीच चर्चा-विमर्श किया.

खेती से आमदनी बढ़ानी है तो करें संपर्क

पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र गोंडा के शस्य वैज्ञानिक डॉ. रामलखन सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर किसानों को अपनी खेती के जरिए अपनी आमदनी को और बढ़ाना है तो उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से जुड़ने की जरूरत है.आगे उन्होंने कहा कि गेहूं की कटाई के बाद किसान सबसे पहले खेतों की मिट्टी की जांच जरूर करवा लें, इससे मिट्टी में कौन से पोषक तत्व की कमी है उसकी भी जानकारी मिल जाएगी.वहीं उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर डीकंपोजर के उपयोग करने की जानकारी दी.इसके साथ ही उन्होंने ढैंचा की खेती करने को लेकर भी किसानों को जागरूक किया और ढैंचा की खेती से होने वाले फायदे के बारे में बताया.

लकी ड्रॉ के जरिए किसानों को दी गई नकद राशि

अंतिम छठवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 16 विजेताओं को 500 रुपये और  दो विजेता  को 1000 रुपये दिए गए. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.

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