ढूंढी बरी गांव में लगा किसान कारवांउत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के साथ मिलकर किसान तक ने किसान कारवां का आयोजन किया. यह कार्यक्रम कानपुर देहात के ढूंढी बरी गांव में हुआ. यह किसान कारवां का 15वां पड़ाव था. इसमें कई किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी आए.
कार्यक्रम में किसानों को नई और अच्छी खेती के तरीके बताए गए. उन्हें फसल की देखभाल और ज्यादा उत्पादन के उपाय समझाए गए. किसानों ने अपनी समस्याएं बताईं और विशेषज्ञों ने वहीं समाधान बताया. चंबल फर्टिलाइजर के अनुराग कटियार ने बताया कि ज्यादा यूरिया और दवाइयों के उपयोग से मिट्टी खराब होती है. उन्होंने कहा कि मृदा जांच जरूरी है. उन्होंने बताया कि उत्तम सुपर राजा और उत्तम प्रणाम मिट्टी को अच्छा बनाते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं.
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता ने फार्मर रजिस्ट्री के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है. उन्होंने बीजों की मिनी किट योजना के बारे में भी बताया, जिसमें कुछ किसानों को मुफ्त बीज मिलते हैं. सरकार बीजों पर 50 प्रतिशत तक मदद देती है.
डॉ. हर्ष गौतम ने बकरी पालन और पशुपालन की योजनाओं के बारे में बताया. उन्होंने नंदिनी योजना और नंद बाबा योजना के बारे में बताया. इन योजनाओं में किसानों को 35 से 40 प्रतिशत तक मदद मिलती है.
डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अमरुद और आंवला जैसी फसलें बहुत लाभ देती हैं. उन्होंने कहा कि ये फसलें 15 से 20 साल तक कमाई दे सकती हैं. अच्छा अमरुद 80 से 100 रुपये किलो तक बिकता है.
डॉ. निमिषा अवस्थी ने बताया कि दूध से दही, पनीर और घी बनाकर किसान ज्यादा पैसा कमा सकते हैं. उन्होंने घर में पोषण वाटिका लगाने की सलाह भी दी, ताकि कुपोषण और एनीमिया से बचा जा सके.
अनिल कुमार सिंह ने बताया कि फार्म मशीनरी योजना के तहत ट्रैक्टर और अन्य यंत्रों पर सरकार मदद दे रही है. फार्मर रजिस्ट्री से जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड भी बन रहा है.
मनोज कुमार ने बताया कि सरकार बीजों पर 50 प्रतिशत तक मदद दे रही है. जायद और खरीफ फसलों के लिए मिनी किट योजना भी चल रही है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है.
आठवें चरण में, जादूगर सलमान ने एक दिलचस्प प्रेजेंटेशन के ज़रिए कोऑपरेटिव खेती के फायदे बताए और किसानों को एकता का संदेश दिया.
लकी ड्रॉ में 500 रुपये के 10 पुरस्कार, 2000 रुपये का दूसरा पुरस्कार और 3000 रुपये का पहला पुरस्कार दिया गया. पहला पुरस्कार किसान रामकेश और दूसरा पुरस्कार किसान कामरान ने जीता.
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