सूखे से जालना में बढ़ी चिंतामहाराष्ट्र के जालना जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने किसानों और पशुपालकों के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं. जिले की सभी आठ तहसीलों में ‘ट्रिगर-1’ यानी सूखे के पहले चरण की घोषणा के बाद प्रशासन ने जिले से चारा बाहर ले जाने और बेचने पर रोक लगा दी है. साथ ही सूखे से प्रभावित किसानों की फसलों के नुकसान का पंचनामा जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें सरकारी मदद जल्द मिल सके.
जिला प्रशासन को आशंका है कि सूखे की स्थिति को देखते हुए जालना में उपलब्ध चारा दूसरे जिलों या महाराष्ट्र से बाहर बड़ी मात्रा में भेजा जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो जिले में पशुओं के लिए चारे की कमी हो सकती है. इसी को देखते हुए जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने चारे की बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है. यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है. आदेश 30 सितंबर 2026 की रात 12 बजकर 1 मिनट से लागू हो गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा.
प्रशासन के आदेश के मुताबिक जालना जिले की सीमा से बाहर हरा चारा, कड़बा, कुट्टी, भूसा, टीएमआर यानी टोटल मिक्स्ड राशन और दूसरे प्रकार के पशु आहार को ले जाने पर रोक रहेगी. इन चीजों को दूसरे जिलों या महाराष्ट्र से बाहर बिक्री के लिए भेजने की भी अनुमति नहीं होगी. प्रशासन का कहना है कि सूखे के समय जिले में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध रहना जरूरी है. अगर चारा बड़ी मात्रा में बाहर चला गया तो जिले में पशुओं के लिए चारा संकट पैदा हो सकता है. इससे पशुधन के जीवन पर भी खतरा पैदा हो सकता है और आगे चलकर कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति भी बन सकती है.
जालना की सभी आठ तहसीलों में सूखा घोषित होने के बाद अब खरीफ सीजन 2026 में हुए फसल नुकसान का आकलन भी तेजी से किया जा रहा है. जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रभावित किसानों के खेतों में जाकर फसल नुकसान का संयुक्त पंचनामा जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए तहसीलदार, गटविकास अधिकारी और तालुका कृषि अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है. ग्राम महसूल अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और कृषि अधिकारी या कृषि सहायकों को गांवों में जाकर मौके पर फसल की स्थिति देखने और नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने को कहा गया है.
पंचनामा पूरा होने के बाद प्रभावित किसानों की सूची ग्राम पंचायत की चावड़ी पर सार्वजनिक की जाएगी. इसका मकसद यह है कि किसान अपनी जानकारी और दर्ज किए गए नुकसान को देख सकें. अगर किसी किसान को सूची में दर्ज जानकारी को लेकर आपत्ति या शिकायत है तो उसकी जांच की जाएगी और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने अधिकारियों को पंचनामे की प्रगति रिपोर्ट हर दिन देने के निर्देश भी दिए हैं. इससे प्रशासन को यह पता चलता रहेगा कि किस गांव और तहसील में कितने किसानों के नुकसान का आकलन पूरा हो चुका है.
जिला प्रशासन ने पंचनामा प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करने, काम को टालने या किसी तरह की बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. ऐसे मामलों में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से 60 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. प्रशासन का कहना है कि सूखे से प्रभावित किसानों तक फसल नुकसान की सहायता जल्द पहुंचाने के लिए नुकसान का सही और समय पर रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी है. इसी वजह से अधिकारियों को पंचनामा प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं.
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