झांसी पहुंचा किसान कारवांवीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की ऐतिहासिक धरती झांसी जनपद के चंद्रा अंबाबाई गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के साझे प्रयास से चलाए जा रहे इस किसान कारवां की 75 जिलों की बड़ी यात्रा में यह 22वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी देखने को मिली.
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत खेती की तकनीकों, फसल उत्पादन बढ़ाने के उपायों और आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी दी. साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन और टिकाऊ खेती के तरीकों पर मार्गदर्शन किया गया.
किसान कारवां के पहले चरण में पशुपालन विभाग के डिप्टी सीवीओ डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने नंदिनी योजना और नंद बाबा योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के तहत सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ रही है. साथ ही उन्होंने खुरपका-मुंहपका जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बताया.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र झांसी की अध्यक्ष डॉ. निशि रॉय ने सब्जी की पौध उत्पादन तकनीक से कम समय में अधिक लाभ कमाने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पौध उत्पादन से प्रति पौधा 2 से 3 रुपये की आमदनी संभव है और 15-20 दिन का समय भी बचता है. साथ ही सोलर ड्रायर के माध्यम से सब्जियों के संरक्षण और टमाटर से कैचप व चटनी बनाने जैसे वैल्यू एडिशन के उपाय भी बताए.
तीसरे चरण में प्राकृतिक खेती विशेषज्ञ आचार्य अविनाश ने कहा कि प्राकृतिक खेती ही देश का भविष्य है और आज देशभर में 50 लाख से अधिक किसान इससे जुड़ चुके हैं. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल मिट्टी स्वस्थ रहती है, बल्कि पोषक और स्वास्थ्यवर्धक अनाज भी मिलता है. इसके लिए देसी गौवंश पालन को जरूरी बताया गया.
चौथे चरण में इफको के डिप्टी फील्ड मैनेजर कृष्ण पाल सिंह ने नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग और लाभ बताए. उन्होंने बताया कि लिक्विड डीएपी से बीज संशोधन करने पर फसल लागत कम होती है और मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है.
पांचवें चरण में कृषि विभाग के सहायक टेक्निकल अधिकारी नरेश कुमार ने फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया और इसके लाभों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह किसानों के लिए पहचान पत्र का कार्य करेगी, जिससे खाद, किसान सम्मान निधि सहित सभी सरकारी योजनाओं का लाभ और जमीन का डिजिटल डाटा उपलब्ध होगा.
छठे चरण में प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह और विनोद कुमार तिवारी ने अपने अनुभव साझा किए. विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती आधारित फार्म विकसित किया है, जहां बिना रासायनिक उर्वरक के 20 से अधिक फसलें उगाई जा रही हैं और उनकी आय तीन गुना तक बढ़ चुकी है.
सातवें चरण में झांसी कृषि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वैभव सिंह ने गिरिराज किस्म की राई और चने की फसल में लगने वाली बीमारियों की जानकारी दी, जो किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है.
आठवें चरण में प्रदेश गौ सेवा आयोग के सदस्य श्याम बिहारी गुप्ता ने किसानों से खेत न बेचने और हर खेत पर तालाब, मेड़ पर पेड़ और पशुपालन को अपनाने की बात कही. उन्होंने देसी गाय के गोबर और गोमूत्र की खरीद की भी जानकारी दी.
नवां चरण में जादूगर सलमान ने किसानों से खेती के साथ पशुपालन अपनाकर अपनी सोच और उत्पादन दोनों बढ़ाने की अपील की.
दसवें और अंतिम चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें खुशबू ने द्वितीय पुरस्कार ₹2000 और राजकुमारी ने प्रथम पुरस्कार ₹3000 जीता.
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