अब कम टूटे दानों वाला चावल मिलेगा राशन मेंकेंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PM-GKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत बांटे जाने जाने वाले चावल की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है. आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने करीब 30 साल बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में दिए जाने वाले चावल के क्वालिटी मानकों में बदलाव को मंजूरी दे दी है.
नई व्यवस्था के तहत अब राशन में मिलने वाले चावल में टूटे दानों की मात्रा काफी कम होगी. कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि उसना चावल में यह सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 5 प्रतिशत कर दी गई है.
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लाभ पाने वाले 80 करोड़ से अधिक लोगों को बेहतर क्वालिटी का चावल मिलेगा. खास बात यह है कि लाभार्थियों को मिलने वाले राशन की मात्रा में कोई कमी नहीं की जाएगी.
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी निर्णय लिया गया है।
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) July 1, 2026
लगभग तीन दशकों में पहली बार #PMGKAY के अंतर्गत वितरित किए जाने वाले चावल के… pic.twitter.com/WbklxvKpPy
सरकार बेहतर क्वालिटी वाले चावल की खरीद तत्काल शुरू करेगी और इसे खरीफ मार्केटिंग सीजन 2027-28 तक सभी खरीद राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. इसके बाद राज्यों में भी नए मानकों के अनुसार चावल का वितरण शुरू होगा.
नई व्यवस्था के तहत मिलिंग के दौरान निकलने वाले टूटे चावल को अलग किया जाएगा और उसका उपयोग अन्य औद्योगिक और व्यावसायिक काम में किया जाएगा. इससे लाभार्थियों तक अधिक साबुत और बेहतर क्वालिटी वाला चावल पहुंचेगा.
सरकार को होगी हजारों करोड़ की बचत
सरकार के अनुसार, टूटे चावल की सीधे मिलों से नीलामी और भंडारण व्यवस्था में सुधार के कारण परिवहन, पैकेजिंग और रखरखाव लागत में कमी आएगी. इससे हर साल करीब 2,161 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है. साथ ही टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त आय भी होगी, जिससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी.
चावल की बोरियों पर QR कोड टैग लगाए जाएंगे, जिससे पूरी सप्लाई चेन की निगरानी संभव होगी. इससे राशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी. सरकार ने बताया कि इस व्यवस्था का परीक्षण हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफलतापूर्वक किया जा चुका है. अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा.
लगभग 30 वर्षों में पहली बार चावल में स्वीकार्य टूटे दानों की सीमा में कमी.
कच्चे चावल में अधिकतम 10 प्रतिशत और उसना चावल में अधिकतम 5 प्रतिशत टूटे दानों की अनुमति.
पीएमजीकेएवाई के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को बेहतर क्वालिटी वाला चावल.
अलग किए गए टूटे चावल का उत्पादक और औद्योगिक उपयोग.
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड
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