El Nino के असर पर केंद्र सतर्क, PM मोदी ने मॉनसून की तैयारियों को लेकर मंत्रालयों को दिए निर्देश

El Nino के असर पर केंद्र सतर्क, PM मोदी ने मॉनसून की तैयारियों को लेकर मंत्रालयों को दिए निर्देश

सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में मॉनसून और अल नीनो के संभावित असर पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को पहले से तैयारी करने और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. सरकार ने कम और अधिक बारिश दोनों स्थितियों से निपटने के लिए सतर्क रहने को कहा है.

Advertisement
El Nino के असर पर केंद्र सतर्क, PM मोदी ने मॉनसून की तैयारियों को लेकर मंत्रालयों को दिए निर्देशमॉनसून काे लेकर पीएम मोदी ने कैबिनेट मीटिंग में की चर्चा

मॉनसून की मौजूदा और संभावित स्थिति को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मॉनसून के हालात पर चर्चा हुई. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए. आकलन में संकेत मिले हैं कि इस साल अल नीनो के असर के कारण मॉनसून के स्वरूप में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल सकता है. इसके चलते देश के कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश की संभावना जताई गई है. प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रालयों से कहा है कि वे सम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तैयारियां समय रहते पूरी रखें. साथ ही राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत आवश्यक कदम उठाए जा सकें.

नीति आयोग की बैठक में भी अल नीनो पर किया था सतर्क

गौरतलब है कि इससे पहले 12 जून को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों को संभावित अल नीनो परिस्थितियों को लेकर आगाह किया था. उन्होंने राज्यों से जल संरक्षण को प्राथमिकता देने, मौसम संबंधी जोखिमों के लिए पहले से तैयारी करने और केंद्र के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक कदम उठाने का आह्वान किया था. प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि बदलते मौसम के प्रभाव का सबसे अधिक असर कृषि, जल संसाधनों और आजीविका पर पड़ सकता है, इसलिए समय रहते तैयारी जरूरी है.

कृषि मंत्रालय भी अल नीनो पर दे चुका अपडेट

वहीं, 23 जून को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मॉनसून की स्थिति, खरीफ फसलों और राज्यों की तैयारियों का आकलन किया गया. मंत्रालय के अनुसार, अल नीनो और मॉनसून की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए मंत्री स्तर पर नियमित समीक्षा जारी रहेगी. इसके साथ ही अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप को मौसम और फसलों की स्थिति पर सतत निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है.

111 जिलों पर सबसे ज्‍यादा असर की आशंका

बैठक में प्रस्तुत आकलन के मुताबिक, अगर वर्षा की कमी का मौजूदा रुझान बना रहता है तो देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश का असर पड़ सकता है. इनमें 111 जिले ऐसे हैं, जिन्हें सबसे ज्‍यादा संवेदनशील माना गया है, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा केवल करीब 25 प्रतिशत क्षेत्र तक ही उपलब्ध है. 

कृषि मंत्रालय ने आशंका जताई है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में अल नीनो का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है. समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ सीजन की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

संवेदनशील जिलों पर ज्‍यादा फोकस

इसी के मद्देनजर सभी संवेदनशील जिलों की जिला कृषि आकस्मिकता योजना (DACP) को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट कर तत्काल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. राज्यों से कहा गया है कि जल संरक्षण, वैकल्पिक और कम पानी वाली फसलों, बीज और उर्वरकों की अग्रिम उपलब्धता, किसानों तक कृषि सलाह पहुंचाने, बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और चारे और खाद्य सुरक्षा से जुड़े इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए जाएं, ताकि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर खेती और किसानों पर न्यूनतम रहे. (इनपुट- हिमांशु मिश्रा)

POST A COMMENT