खाने के तेल की पैकेजिंग पर सरकार का बड़ा फैसला: अब मनमानी नहीं कर सकेंगी कंपनियां, पढ़ें डिटेल

खाने के तेल की पैकेजिंग पर सरकार का बड़ा फैसला: अब मनमानी नहीं कर सकेंगी कंपनियां, पढ़ें डिटेल

केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों की पैकेजिंग को लेकर नया निर्देश जारी किया है. इसका मकसद उपभोक्ताओं को ज्यादा पारदर्शिता देना, कीमतों की तुलना आसान बनाना और बाजार में गैर-मानक पैक साइज से होने वाले भ्रम को खत्म करना है.

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खाने के तेल की पैकेजिंग पर सरकार का बड़ा फैसला: अब मनमानी नहीं कर सकेंगी कंपनियां, पढ़ें डिटेलतेल की पैकेजिंग पर सरकार का बड़ा फैसला

खाद्य तेल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने खाद्य तेलों की पैकेजिंग से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए नया निर्देश जारी किया है, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांडों की कीमतों की तुलना करना आसान होगा. यह फैसला लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत 29 दिसंबर 2023 की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) में संशोधन करके लिया गया है. सरकार का कहना है कि बाजार में बढ़ते गैर-मानक पैक साइज के कारण कंज्यूमर्स  के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी. इसी को देखते हुए उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद यह नई एडवाइजरी जारी की गई है.

तेलों की पैकेजिंग के ये होंगे मानक 

इसके तहत पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सूरजमुखी तेल, सरसों तेल, मूंगफली तेल, तिल तेल, राइस ब्रान ऑयल, बिनौला तेल, मक्का तेल और इनके मिश्रणों के लिए मानक पैक साइज़ अपनाने की सलाह दी गई है. सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से ग्राहकों को सही जानकारी मिलेगी.

इन तेलों के लिए 200 ग्राम, 500 ग्राम, 1 किलोग्राम, 2 किलोग्राम, 3 किलोग्राम, 4 किलोग्राम, 5 किलोग्राम, 15 किलोग्राम और 20 किलोग्राम के पैक निर्धारित किए गए हैं. इसी तरह यदि तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी जाती है, तो 200 मिलीलीटर, 500 मिलीलीटर, 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर, 5 लीटर, 15 लीटर और 20 लीटर के मानक पैक उपलब्ध होंगे.

सरकार ने किया पैकेजिंग में ये बदलाव

नई व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी किया गया है कि यदि पैकेट पर तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में लिखी गई है, तो उसके साथ बराबर वजन (ग्राम या किलोग्राम) की जानकारी भी देना अनिवार्य होगा. इससे ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांडों और पैक आकारों की कीमतों की तुलना करने में आसानी होगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम देश में निर्मित और इंपोर्ट दोनों तरह के खाद्य तेलों पर समान रूप से लागू होंगे. हालांकि अन्य विशेष प्रकार के खाद्य तेलों को मानक पैक साइज़ की अनिवार्यता से छूट दी गई है, लेकिन उन्हें भी यूनिट सेल प्राइस (USP) से जुड़े नियमों का पालन करना होगा.

नई एडवाइजरी के अनुसार, खाद्य तेलों की मात्रा की जांच, सैंपलिंग, टेस्टिंग और त्रुटियों की जांच पहले की तरह निर्धारित ही की जाएगी. कंपनियां चाहें तो नए पैक साइज़ तुरंत लागू कर सकती हैं, लेकिन नियमों का पूरी तरह पालन करने के लिए उन्हें तीन महीने का ट्रांजिशन पीरियड दिया गया है.

ऑयल एसोसिएशन ने फैसले का किया स्वागत

वहीं, इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) ने खाद्य तेलों के लिए पैक साइज़ दोबारा लागू करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है. एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम खाद्य तेल बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. आईवीपीए और अन्य उद्योग संगठनों के लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों और सरकार के साथ लगातार संवाद के बाद यह फैसला लिया गया है. सरकार ने हाल ही में एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है, जिसके तहत खाद्य तेलों के लिए मानक पैक साइज़ फिर से लागू किए जाएंगे.

उद्योग जगत का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाजार में अलग-अलग और गैर-मानक पैक आकारों की संख्या बढ़ गई थी. इससे ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांडों की कीमतों की तुलना करना मुश्किल हो गया था. कई बार पैकेजिंग के अलग-अलग आकारों के कारण ग्राहकों में भ्रम की स्थिति भी पैदा होती थी.

खुदरा बाजार में मजबूत होगी व्यवस्था  

आईवीपीए के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि सरकार ने उद्योग की चिंताओं को गंभीरता से सुना और लंबे समय से लंबित इस मुद्दे का समाधान किया है. उन्होंने बताया कि गैर-मानकीकृत पैक साइज की व्यवस्था शुरू करने का उद्देश्य उद्योग को अधिक लचीलापन देना था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इससे बाजार में कई तरह के पैक आ गए, जिससे उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच भ्रम बढ़ा. उन्होंने कहा कि मानकीकृत पैक साइज की वापसी से खुदरा बाजार में व्यवस्था मजबूत होगी और सभी कंपनियों को समान अवसर मिलेंगे. साथ ही उपभोक्ताओं को भी सही और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होगी. देसाई ने यह भी कहा कि सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग का यह एक अच्छा उदाहरण है. इससे न केवल नियमों में स्पष्टता आएगी, बल्कि ग्राहकों के हितों की भी बेहतर सुरक्षा हो सकेगी.

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