कोयले से यूरिया उत्पादन बढ़ाने की तैयारी (सांकेतिक तस्वीर)देश में उर्वरक उत्पादन को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक नई नीति तैयार कर रही है, जिसमें कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया उत्पादन को विशेष महत्व दिया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, यह नीति अंतिम चरण में है और अगले एक महीने के भीतर इसे लागू किए जाने की संभावना है. इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए उर्वरक क्षेत्र को मजबूत बनाना है.
भारत अभी भी यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस पर काफी हद तक निर्भर है, जिसमें एक महत्वपूर्ण हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है. ऐसे में अगर कोयले से यूरिया उत्पादन को बढ़ावा मिलता है तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ देश की ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा भी मजबूत होगी. सरकार इसे आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रही है.
कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय काफी समय से नई यूरिया नीति पर काम कर रहा है. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस प्रक्रिया में तेजी लाई गई है. उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय की ओर से सुझाव दिया गया है कि नई नीति में कोयला गैसीकरण से बनने वाले यूरिया को भी शामिल किया जाए. यह प्रस्ताव अब काफी आगे बढ़ चुका है और जल्द अंतिम रूप ले सकता है.
कोयला गैसीकरण तकनीक में कोयले और पेटकोक को उच्च तापमान पर संसाधित कर सिंथेटिक गैस तैयार की जाती है. इस गैस से प्राप्त हाइड्रोजन को वायुमंडल से मिलने वाले नाइट्रोजन के साथ मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है. बाद में अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से यूरिया का उत्पादन किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में प्राकृतिक गैस की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे आयात पर निर्भरता घट सकती है.
कोयला आधारित उर्वरक परियोजनाओं से जुड़े उद्योग समूहों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को गैस आधारित संयंत्रों के समान अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर उत्पादन के बाद यूरिया की खरीद और मार्केटिंग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए तो इस क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित किए जा सकते हैं.
महाराष्ट्र की कंपनी न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन ने सरकार को भेजे अपने सुझावों में कोयला आधारित यूरिया परियोजनाओं के लिए अलग क्षमता आरक्षित करने और उत्पाद की खरीद सुनिश्चित करने की व्यवस्था की मांग की है. कंपनी चंद्रपुर जिले के भद्रावती क्षेत्र में 1.27 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता वाला कोयला गैसीकरण आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है. यह परियोजना देश में वैकल्पिक फीडस्टॉक आधारित उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. (पीटीआई)
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