किस सब्जी की वैरायटी है क्वीनसब्जी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है. लोग हमेशा खुद को स्वस्थ रखने के लिए अलग-अलग प्रकार की सब्जियों को खाते हैं. इसलिए मार्केट में भी पूरे साल हरी सब्जियों की डिमांड बनी रहती है. ऐसे में कई सब्जियों की ऐसी किस्में हैं जो उनकी खासियत को बढ़ा देते हैं. ऐसी ही एक सब्जी की किस्म है 'क्वीन'. आपको बता दें, सभी मौसम में बाजार में मिलने वाली सब्जी करेले की किस्म क्वीन है. करेले की इस किस्म की किसानों में खूब डिमांड रहती है. किसान इसकी खेती कर बेहतर उपज और कमाई करते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं क्वीन वैरायटी की क्या खासियत है. साथ ही इसके 5 उन्नत वैरायटी के बारे में भी जानिए.
क्वीन किस्म: करेले की क्वीन किस्म की खेती उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में मार्च से जुलाई महीने तक की जाती है. वहीं इस किस्म के फल मोटे और गहरे चमकीले हरे रंग के होते हैं. अगर बात करें इसके उत्पादन की तो इस किस्म से प्रति एकड़ 60 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है. ये किस्म 50 से 60 दिनों में फल देने लगता है.
पूसा हाइब्रिड 1: करेले की ये किस्म देश के उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में खेती करने के लिए उपयुक्त है. इसके फल हरे और थोड़े चमकदार होते हैं. वहीं, इसकी खेती वसंत ऋतु, गर्मी और बारिश तीनों मौसमों में आसानी से की जा सकती है. करेले की इस किस्म की पहली तुड़ाई 55 से 60 दिनों में की जा सकती है.
अर्का हरित: करेला की इस किस्म के फल मध्यम आकार के होते हैं. हालांकि, अन्य किस्मों की तुलना में अर्का हरित करेले कम कड़वे होते हैं. वहीं, इस किस्म के फलों में बीज भी कम होते हैं. इसकी खेती गर्मी और बारिश के मौसम में आसानी से की जा सकती है. बात करें उत्पादन कि तो प्रति एकड़ लगभग 36 से 48 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है.
पूसा विशेष: करेले की इस किस्म की खेती भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में बारिश के मौसम में की जाती है. वहीं, इस किस्म के फल मोटे एवं गहरे चमकीले हरे रंग के होते हैं. अगर बात करें इसके उत्पादन की तो इस किस्म से प्रति एकड़ 50 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है.
पूसा हाइब्रिड 2: करेले की इस किस्म की खेती बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में आसानी से की जा सकती है. वहीं, इस किस्म के फलों का रंग गहरा हरा होता है. करेले की इस किस्म की पहली तुड़ाई 52 दिनों बाद की जा सकती है.
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