EAC-PM के सदस्य गौरव वल्लभ (फाइल फोटो)भारत की कृषि और पोषण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम सुझाव देते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य गौरव वल्लभ ने कहा कि देश को अब सामूहिक रूप से यह संकल्प लेना होगा कि भारत में वही उगाया जाए, जो भारत खाता है. इस सोच से न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों की आमदनी, पोषण सुरक्षा और निर्यात क्षमता को भी नई ऊंचाई मिलेगी. नई दिल्ली में आयोजित ‘मेवा इंडिया 2026’ के तीसरे संस्करण में गौरव वल्लभ ने कहा कि आज दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जहां 2 से 3 प्रतिशत की विकास दर के लिए संघर्ष कर रही हैं.
वहीं, भारत 7 प्रतिशत से अधिक की दर से आगे बढ़ रहा है. इसमें भी खास बात यह है कि यह विकास नियंत्रित महंगाई के साथ हो रहा है. इसका सीधा असर लोगों की प्रति व्यक्ति आय, जीवन स्तर और खानपान की आदतों पर पड़ रहा है. गौरव वल्लभ ने कहा कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, वैसे-वैसे लोगों का झुकाव पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों की ओर होता है. ड्राई फ्रूट्स और नट्स इसी बदलती खपत का प्रतीक हैं.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि नट्स और सूखे मेवे विकसित भारत की पहचान बन सकते हैं, क्योंकि ये पोषण से भरपूर हैं, निर्यात योग्य हैं और आत्मनिर्भर भारत की सोच के अनुरूप हैं. अगर भारत अपने उपभोग के अनुसार उत्पादन बढ़ाए तो आयात को निवेश में और खेतों को समृद्धि के केंद्र में बदला जा सकता है.
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है, जिसमें कृषि और खाद्य क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि ड्राई फ्रूट्स और नट्स जैसे उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि मेवा इंडिया अब केवल एक ट्रेड एग्जीबिशन नहीं रह गया है, बल्कि यह ड्राई फ्रूट्स और नट्स उद्योग के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक रणनीतिक मंच बन चुका है. यहां नीति, निवेश, तकनीक और बाजार को लेकर सामूहिक मंथन हो रहा है, जो इस सेक्टर को मजबूत बना रहा है.
भागीरथ चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता मानकों, ट्रेसबिलिटी, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म में लगातार निवेश कर रही है. इससे भारत वैश्विक खाद्य मूल्य श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विकास यात्रा में किसानों को बराबर का भागीदार और लाभार्थी बनाना सरकार की प्राथमिकता है.
नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल इंडिया के अध्यक्ष गुंजन विजय जैन ने कहा कि मेवा इंडिया भारतीय उद्योग और वैश्विक बाजारों के बीच एक मजबूत पुल बन चुका है. यह मंच न केवल व्यापार को बढ़ावा देता है, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य जागरूकता और जिम्मेदार विकास जैसे मुद्दों पर भी सार्थक संवाद को आगे बढ़ाता है.
वहीं, एनडीएफसीआई के सीईओ नितिन सहगल ने बताया कि मेवा इंडिया 2026 के दौरान तकनीक, गुणवत्ता मानक, पोस्ट हार्वेस्ट प्रैक्टिस और बाजार तक पहुंच जैसे विषयों पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच गहन चर्चा हुई. यह भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है. कार्यक्रम में 30 से अधिक देशों के 300 से ज्यादा प्रदर्शकों और 10,000 से अधिक बिजनेस विजिटर्स ने भाग लिया, जिसमें ट्रेड, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, न्यूट्रिशन साइंस और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े वैश्विक अनुभवों का प्रदर्शन हुआ.
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