Pumpkin Farming: 2 बीघे में कद्दू की खेती कर रहा ये किसान, लाखों की हो रही कमाई

Pumpkin Farming: 2 बीघे में कद्दू की खेती कर रहा ये किसान, लाखों की हो रही कमाई

Success Story: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी का एक किसान 56 कद्दू की खेती कर रहे हैं. इस खेती से उनको अच्छा-खासा मुनाफा होता है. एक बीघे में 56 कद्दू की खेती में 10 से 12 हजार रुपए की लागत आती है. जबकि इससे 90 हजार रुपए तक की कमाई होती है. ये किसान 2 बीघे में 56 कद्दू की खेती करते हैं और लाखों की कमाई करते हैं.

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Pumpkin Farming: 2 बीघे में कद्दू की खेती कर रहा ये किसान, लाखों की हो रही कमाईPumpkin Farming (Photo/ Meta AI)

सब्जियों की खेती आमदनी का अच्छा-खासा व्यवसाय बन गया है. कई किसान इसे उगा रहे हैं और बढ़िया कमाई कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक किसान कद्दू की खेती कर रहे हैं और लाखों की कमाई कर रहे हैं. सगीर अहमद नाम के ये किसान 56 कद्दू की खेती करते हैं. एक बीघे में इसकी खेती में 10 से 12 हजार रुपए खर्च होते हैं. जबकि इससे मुनाफा 80 से 90 हजार रुपए तक होता है.

एक बीघा में 90 हजार तक का फायदा-

किसान सगीर अहमद करीब 2 बीघे में 56 कद्दू की फसल उगाते हैं. हिंदी न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस खेती से उनको डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा की कमाई होती है. रिपोर्ट के मुताबिक एक बीघे खेत में कद्दू लगाने में 10 से 12 हजार रुपए तक का खर्च आता है. जबकि एक बीघे खेत से एक फसल से 80 से 90 हजार रुपए का फायदा होता है. इस तरह से 2 बीघे जमीन पर 56 कद्दू की खेती से डेढ़ लाख से ज्यादा की कमाई होती है.

बाजार में कद्दू की बहुत डिमांड है. इसका इस्तेमाल सब्जियों के अलावा दूसरी चीजों में भी होता है. इसलिए मार्केट में इसका अच्छा रेट मिलता है. इस फसल में कम लागत आती है और मुनाफा ज्यादा होता है.

धान-गेहूं से होता था कम फायदा-

किसान सगीर अहमद बाराबंकी के मसौली ब्लॉक क्षेत्र के पलहरी गांव के रहने वाले हैं. सगीर अहमद पहले पारंपरिक खेती करते थे. धान, गेहूं और सरसों की खेती करते थे. लेकिन उससे कुछ ज्यादा फायदा नहीं होता था. इसके बाद उन्होंने सब्जियों की खेती करने की सोची. उन्होंने बैंगन, गोभी और मटर की खेती करने लगे. इससे उनको काफी मुनाफा होने लगा. अब सगीर अहमद 56 कद्दू की खेती कर रहे हैं और अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं.

कैसे होती है 56 कद्दू की खेती-

56 कद्दू की बिजाई के लिए सबसे अनुकूल समय जनवरी से मार्च और अक्टूबर से नवंबर तक का होता है. कद्दू की अच्छी पैदावार दोमट या बलुई दोमट मिट्टी में होती है. कद्दू की खेती नदी किनारे वाले दियारा इलाके में बहुत अच्छी होती है. बीजों को खेत में बनाए गए मेड़ों पर लगााना चाहिए. इनके बीच डेढ़ से 2 फुट की दूरी होनी चाहिए. बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई में लगाना चाहिए.

बीज होने के फौरन बाद इसकी सिंचाई भी करनी चाहिए. मौसम के हिसाब से 6-7 दिनों के अंतराल में सिंचाई करनी चाहिए. 56 कद्दू की फसल को तैयार होने में 9-10 सिंचाइयां करनी पड़ती है. फसल को तैयार होने में 45-55 दिन लगते हैं.

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