Padma Awards 2026: दादा लाड को 'पद्मश्री' पुरस्कार, जानें कैसे मिली पहचान

Padma Awards 2026: दादा लाड को 'पद्मश्री' पुरस्कार, जानें कैसे मिली पहचान

परभणी जिले के जिंतूर तालुका के प्रगतिशील किसान श्रीरंग उर्फ ​​दादा लाड को खेती में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 का पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.

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Padma Awards 2026: दादा लाड को 'पद्मश्री' पुरस्कार, जानें कैसे मिली पहचानदादा लाड को 'पद्मश्री' पुरस्कार

भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा हो चुकी है. इस साल की घोषित सूची में कृषि और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हैं, जिन्होंने खेती, डेयरी, पशुधन विकास, और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में बेहतर काम किए हैं. इन किसानों ने अपनी मेहनत और नए तरीके अपनाकर समाज में बदलाव लाया  और किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दिया. उनके काम से न सिर्फ समाज बेहतर हुआ, बल्कि नई सोच और प्रेरणा भी पैदा हुई. आइए जानते हैं ऐसे ही एक किसान की श्रीरंग देवबा लाड बेमिसाल कहानी, जिन्होंने अपने काम से देश के लिए मिसाल कायम की.

कौन हैं श्रीरंग देवबा लाड? 

79 साल के कृषि इनोवेटर श्रीरंग देवबा लाड, जिन्हें इस साल 'अनसंग हीरोज' कैटेगरी में पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है, उनके लिए यह सम्मान व्यक्तिगत खुशी की बात नहीं है, बल्कि किसानों के लिए काम करने की प्रेरणा है. मध्य महाराष्ट्र के परभणी जिले के मलसोना गांव के रहने वाले श्रीरंग देवबा लाड जिन्हें दादा लाड के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें कपास अनुसंधान में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है.

पुरस्कार को लेकर क्या बोले दादा लाड

उनके रिसर्च से विकसित कपास की किस्मों से पैदावार में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे हजारों किसानों को आर्थिक राहत मिली है. दादा लाड, जिन्हें किसान समुदाय में 'कृषि ऋषि' के नाम से जाना जाता है, उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार लोगों के बीच तकनीकी ज्ञान फैलाने में मदद करेगा और देश भर के किसानों को फायदा पहुंचाएगा.

दादा लाड ने कहा कि यह सम्मान मेरे लिए व्यक्तिगत खुशी की बात नहीं है. मेरा रिसर्च अब अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगा, जब किसान इन तरीकों को अपनाएंगे और अपनी फसल की पैदावार बढ़ाएंगे, तो उनके जीवन में खुशी फैलेगी और वही मेरी सच्ची खुशी होगी.

कपास की खेती से मिली पहचान

अपनी 'दादा लाड' कपास खेती तकनीक के बारे में और बताते हुए, उन्होंने कहा कि उन्होंने गेहूं, ज्वार और कपास जैसी फसलों की पैदावार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया. कर्नाटक के इंडी गांव में किसान पहले प्रति एकड़ केवल 5 से 6 क्विंटल ज्वार की कटाई करते थे. लाड ने कहा कि उनके तरीकों को लागू करने के बाद पैदावार बढ़कर 28 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई. उन्होंने बताया कि मैं एक किसान परिवार से आता हूं और बचपन से ही खेती से जुड़ा रहा हूं. मेरी लगन और रुचि को देखकर, भारतीय किसान संघ ने मुझे उनके साथ काम करने का मौका दिया.

"पुरस्कार ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है"

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, केंद्र सरकार ने 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे इनोवेशन के साथ, मुझे विश्वास है कि देश में कभी भी खाद्यान्न की कमी नहीं होगी. इस पुरस्कार ने किसानों के कल्याण के लिए और भी कड़ी मेहनत करने की मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है.  

दादा लाड की प्रेरक कहानी

1 जनवरी, 1947 को जन्मे लाड ने अपनी स्कूली शिक्षा परभणी में की. इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया. अभी, वह RSS से जुड़े भारतीय किसान संघ में अहम ज़िम्मेदारियां संभालते हैं और गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात के लिए 'क्षेत्रीय संगठन मंत्री' के तौर पर काम करते हैं. खेती में उनके योगदान को देखते हुए परभणी में वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय ने पिछले महीने अपने 27वें दीक्षांत समारोह में उन्हें मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की डिग्री से सम्मानित किया. यह सम्मान उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया. 

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