धान से नहीं मिली पहचान, केले की खेती ने बदली तकदीर; आदिवासी किसान अमृत सिंह की आय हुई पांच गुना

धान से नहीं मिली पहचान, केले की खेती ने बदली तकदीर; आदिवासी किसान अमृत सिंह की आय हुई पांच गुना

बिलासपुर के सलखा ग्राम के आदिवासी किसान अमृत सिंह ने धान की पारंपरिक खेती छोड़ केले की उन्नत खेती अपनाकर अपनी आय पांच गुना बढ़ा ली.राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया.

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धान से नहीं मिली पहचान, केले की खेती ने बदली तकदीर; आदिवासी किसान अमृत सिंह की आय हुई पांच गुना

कृषि में आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किसानों की जिंदगी बदल सकता है. इसका प्रेरणादायक उदाहरण बिलासपुर जिले के सलखा ग्राम के आदिवासी किसान अमृत सिंह हैं, जिन्होंने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर केले की उन्नत खेती अपनाई और अपनी आय में पांच गुना तक वृद्धि हासिल की है.

धान की खेती से सीमित थी आमदनी

कुछ वर्ष पहले तक अमृत सिंह अपनी लगभग 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि में मुख्य रूप से धान की खेती करते थे. एक ही फसल पर निर्भर रहने के कारण उनकी वार्षिक आय करीब एक लाख रुपये तक ही सीमित थी. खेती की बढ़ती लागत और कम मुनाफे के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था.ऐसे समय में उन्होंने खेती में बदलाव का निर्णय लिया.

राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई राह

अमृत सिंह को उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत फल क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम से जोड़ा गया.योजना के तहत उन्हें केले की खेती के लिए गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराई गई.साथ ही विभागीय अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तौर-तरीकों का प्रशिक्षण दिया.

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग बनी सफलता की कुंजी

उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में अमृत सिंह ने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और अंतरवर्ती फसल प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया. शासन से प्राप्त अनुदान सहायता के कारण इन तकनीकों को लागू करने में आने वाली आर्थिक बाधाएं भी दूर हो गईं.

आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पानी की बचत हुई, उत्पादन लागत कम हुई और फसल की गुणवत्ता में सुधार आया. इसके साथ ही अंतरवर्ती फसलों से अतिरिक्त आय का स्रोत भी विकसित हुआ.

केले की खेती से आय में पांच गुना बढ़ोतरी

अमृत सिंह ने अपने खेत में व्यावसायिक स्तर पर केले की खेती शुरू की. वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. परिणामस्वरूप उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 5 लाख रुपये तक पहुंच गई, जो पहले की तुलना में पांच गुना अधिक है.

अब दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

आज अमृत सिंह केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर किसान ही नहीं हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन चुके हैं. वे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

सरकारी योजनाओं से बदली जिंदगी

अमृत सिंह का कहना है कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से मिली सहायता ने उनकी खेती को नई दिशा दी है.उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और योजनाओं का लाभ लें, तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित की जा सकती है.

हजारों किसानों के लिए प्रेरणा

अमृत सिंह की सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक खेती और किसानों की मेहनत का समन्वय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उनकी कहानी प्रदेश के हजारों किसानों के लिए प्रेरणादायक संदेश है कि खेती में नवाचार और बदलाव अपनाकर आर्थिक समृद्धि हासिल की जा सकती है.

 

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