यूपी में खाद की खपत में बड़ी गिरावट, सख्ती का दिखा असर, कालाबाजारी गायब

यूपी में खाद की खपत में बड़ी गिरावट, सख्ती का दिखा असर, कालाबाजारी गायब

यूपी में रबी सीजन के दौरान उर्वरक की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. सरकार की सख्ती और पीओएस मशीन में तकनीकी बदलाव से कालाबाजारी पर रोक लगी है. सीमावर्ती जिलों में खाद की मांग कम हुई है, जिससे असली किसानों को समय पर खाद मिल पाई और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है.

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यूपी में खाद की खपत में बड़ी गिरावट, सख्ती का दिखा असर, कालाबाजारी गायबखाद के इस्तेमाल भारी गिरावट

उत्तर प्रदेश में इस रबी सीजन में उर्वरक को लेकर शुरुआत में काफी चर्चा रही. कई जगह किसानों को खाद लेने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा. ऐसा लगा कि खाद की भारी कमी हो गई है. लेकिन जब पूरे सीजन के आंकड़े सामने आए, तो एक अलग ही तस्वीर दिखी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार यूपी में उर्वरक की खपत करीब तीन लाख टन कम हो गई है. कृषि विभाग का कहना है कि इसकी बड़ी वजह सख्ती और नई तकनीक का सही इस्तेमाल है.

कैसे बदली स्थिति इस साल

इस बार सरकार और कृषि विभाग ने उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए. पहले कई जिलों में खाद का गलत तरीके से वितरण होता था. कुछ लोग खाद को दूसरे राज्यों या नेपाल भेज देते थे. इससे असली किसानों को परेशानी होती थी. इस बार पॉइंट ऑफ सेल यानी पीओएस मशीन में तकनीकी बदलाव किए गए. इससे यह साफ हो गया कि खाद कहां और किस समय बेची जा रही है.

आंकड़े क्या कहते हैं

कृषि विभाग के अनुसार, पिछले रबी सीजन में एक अक्टूबर से 31 जनवरी तक लगभग 33 लाख 42 हजार टन उर्वरक बांटा गया था. वहीं इस साल इसी समय में करीब 33 लाख 39 हजार टन उर्वरक का वितरण हुआ. यानी कुल मिलाकर लगभग तीन हजार टन की कमी दर्ज की गई. यह कमी दिखाती है कि पहले जहां ज्यादा खाद दिखाई जाती थी, वहां अब सही आंकड़े सामने आ रहे हैं.

सीमावर्ती जिलों में ज्यादा असर

सबसे ज्यादा कमी उन जिलों में देखी गई है, जो बिहार, मध्य प्रदेश और नेपाल की सीमा से सटे हैं. इन इलाकों में पहले कई बार खाद की कालाबाजारी की शिकायतें मिलती थीं. बलिया जिले में सबसे ज्यादा असर दिखा है. पिछले साल यहां करीब 38 हजार टन खाद बिकी थी, लेकिन इस साल यह आंकड़ा करीब 31 हजार टन ही रहा. यानी लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है.

अन्य जिलों में भी घटी खपत

बलिया के अलावा गाजीपुर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में भी खाद की मांग में कमी आई है. गाजीपुर में 18 प्रतिशत, कुशीनगर में 17 प्रतिशत और सिद्धार्थनगर में 16 प्रतिशत तक उर्वरक की खपत घटी है. इसके साथ ही प्रयागराज, अयोध्या, मेरठ, आगरा, मथुरा, वाराणसी और कई अन्य जिलों में भी पिछले साल के मुकाबले कम खाद बिकी है.

तकनीक ने रोकी कालाबाजारी

इस बार पीओएस मशीन को जीओ टैग किया गया. इसका मतलब है कि मशीन को दुकान से बाहर ले जाकर बिक्री नहीं दिखाई जा सकती. साथ ही रात आठ बजे के बाद होने वाली खाद बिक्री पर भी नजर रखी गई. जिन दुकानदारों ने रात में ज्यादा खाद बेचने का गलत रिकॉर्ड दिखाया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. दिसंबर महीने में 320 विक्रेताओं के लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए.

किसानों के लिए क्या है फायदा

जब कालाबाजारी पर रोक लगती है, तो असली किसान को सही समय पर खाद मिलती है. इससे खेती आसान होती है और फसल अच्छी होती है. सरकार की इस सख्ती से यह साफ हो गया है कि तकनीक का सही इस्तेमाल करके गड़बड़ी रोकी जा सकती है. इससे न सिर्फ किसानों को फायदा होता है, बल्कि खाद का सही और ईमानदार उपयोग भी सुनिश्चित होता है.

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