खेती में केमिकल पेस्टिसाइड का अंधाधुंध इस्तेमाल:खेती में फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इसके खतरनाक असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर के लगभग आधे किसान और खेतिहर मजदूर हर साल अनजाने में कीटनाशक के जहर (Pesticide Poisoning) का शिकार हो रहे हैं.
'फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ' जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन को पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क (PAN) ने तैयार किया है. शोधकर्ताओं ने साल 2006 से 2023 के बीच प्रकाशित 214 वैज्ञानिक अध्ययनों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मृत्यु संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया.
रिसर्च के अनुसार दुनिया में हर साल करीब 4.33 करोड़ गंभीर पेस्टिसाइड पॉइजनिंग (Serious Pesticide Poisoning) के मामले सामने आते हैं. यह संख्या वैश्विक स्तर पर लगभग 46 प्रतिशत किसानों और खेतिहर मजदूरों को प्रभावित करती है. इनमें से लगभग 11 हजार मामले जानलेवा साबित होते हैं.
स्टडी में कहा गया है कि कई मामलों में किसान बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जिससे उनका सीधा संपर्क जहरीले रसायनों से हो जाता है.
शोधकर्ताओं ने पाया कि पेस्टिसाइड पॉइजनिंग का सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ रहा है. दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है.
अध्ययन के अनुसार पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में हर साल करीब 84 प्रतिशत किसान गंभीर कीटनाशक के जहर का शिकार हो सकते हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक आंकड़ों में से एक है.
PAN इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जयकुमार चेलैटन ने RT.Com से कहा कि इन आंकड़ों के पीछे लाखों किसानों, खेत मजदूरों और उनके परिवारों की दुखद कहानी छिपी है.
उन्होंने कहा कि किसान खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार कीटनाशकों के संपर्क में आते हैं और इसकी भारी मानवीय कीमत चुका रहे हैं. उनके मुताबिक यह एक ऐसा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में कीटनाशकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. साल 1990 से 2023 के बीच वैश्विक स्तर पर कीटनाशकों की खपत दोगुने से भी अधिक हो चुकी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और खाद्य उत्पादन की मांग को पूरा करने के लिए किसान अधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं.
हालांकि कीटनाशकों के खतरे अपनी जगह हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का कहना है कि इनके बिना कृषि उत्पादन को भारी नुकसान हो सकता है.
FAO के अनुसार हर साल कीटों, रोगों और खरपतवार के कारण दुनिया की 20 से 40 प्रतिशत तक फसलें नष्ट हो सकती हैं. इसलिए चुनौती यह है कि किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कीटनाशकों का सुरक्षित और संतुलित उपयोग किया जाए.
विशेषज्ञों के मुताबिक कीटनाशकों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों को और गंभीर बना सकती हैं. खासकर वे देश जो पहले से जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, संघर्ष और कृषि संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहां किसानों की सेहत पर पड़ने वाला असर खाद्य उत्पादन को भी प्रभावित कर सकता है.
इसी बीच रूस समेत कई देश और संस्थाएं अफ्रीका और एशिया के जरूरतमंद देशों को खाद्य सहायता, अनाज और उर्वरक उपलब्ध कराने के कार्यक्रम चला रहे हैं, ताकि वैश्विक खाद्य संकट के प्रभाव को कम किया जा सके.
यह रिसर्च बताती है कि खाद्य उत्पादन बढ़ाने की दौड़ में किसानों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित कीटनाशक उपयोग, प्रशिक्षण, सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता और वैकल्पिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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