
अदरक की खेतीकिसान अब तेजी से पारंपरिक फसलों की जगह नकदी फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, और इनमें अदरक की खेती एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है. भारत में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. अदरक का उपयोग मसाले के साथ-साथ औषधि के रूप में भी होता है, जिससे इसकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है. किसानों के लिए यह फसल इसलिए भी फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इसकी कीमत अच्छी रहती है और बिक्री में कोई खास परेशानी नहीं होती. ऐसे में अगर आप भी अदरक की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो अब इसके प्रकंद यानी बीज आप आसानी से ऑनलाइन घर बैठे मंगवा सकते हैं.
अगर किसान नई फसलों की खेती की तरफ रुख करना चाह रहे हैं तो उनके लिए अदरक की खेती एक फायदे का सौदा साबित हो सकती है. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर मार्केट की डिमांड को देखते हुए इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन इसका बेस्ट प्रकंद बेच रहा है. इसको आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद कर बंपर कमाई कर सकते हैं. साथ ही इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं.

अदरक के पौधे पूरी धूप या आंशिक छाया में सबसे अच्छे से उगते हैं. ऐसे में इसकी खेती के लिए ऐसी जगह चुनें जहां रोजाना कम से कम 3 घंटे पूरी धूप मिले. बता दें कि सुबह की धूप और दोपहर की छाया वाली जगह आदर्श होती है. अदरक के पौधों को अच्छी जल निकासी वाली और भरपूर मात्रा में कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी की ज़रूरत होती है. वहीं, अदरक को नियमित रूप से पानी और खाद देने की जरूरत होती है. बता दें कि इस अदरक का प्रकंद लगभग 120-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाता है.
अगर आप भी अदरक की प्रकंद की खेती करना चाहते हैं तो इसका पांच प्रकंद फिलहाल 26 फीसदी की छूट के साथ 255 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल रहा है. इसे खरीद कर आप आसानी से अदरक की खेती कर सकते हैं. साथ ही इसकी खेती से बंपर कमाई कर सकते हैं.
अदरक की खेती मार्च और अप्रैल के महीने में की जाती है. इसकी खेती वर्षा आधारित भी होती है और जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है वो भी इसकी खेती कर सकते हैं. अदरक की खेती के लिए 20-30 डिग्री सेल्सियस का तापमान उचित माना जाता है जबकि इसकी खेती के लिए नमी 70-90 प्रतिशत होनी चाहिए. अदरक की खेती के लिए जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. हालांकि बलुई लाल और चिकनी मिट्टी में भी इसकी खेती अच्छी होती है. वहीं, इसकी रोपाई के लिए एक मीटर चौड़ा और 30 सेंटीमीटर ऊंचा बेड बनाना चाहिए. दो मेड़ों के बीच की दूरी 60 सेंमी होनी चाहिए.
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