कैलिफोर्निया ने पैराक्वाट से बनाई दूरीखेतों में खरपतवार यानी अनचाही घास को खत्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक चर्चित खरपतवारनाशी दवा पैराक्वाट (Paraquat) को लेकर अमेरिका में बड़ा फैसला हुआ है. कैलिफोर्निया में इसके इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. राज्य में पैराक्वाट बनाने वाली कंपनियों ने अपने उत्पादों का रजिस्ट्रेशन स्वेच्छा से रद्द कर दिया है. इस फैसले के बाद मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर इस रसायन के संभावित असर को लेकर बहस फिर तेज हो गई है.
हालांकि, इसे समझते समय एक जरूरी बात ध्यान में रखना चाहिए. कैलिफोर्निया में पैराक्वाट पर पूरी तरह तत्काल प्रतिबंध नहीं लगा है. राज्य के कृषि विभाग के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों के पैराक्वाट उत्पादों का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के साथ इसका इस्तेमाल धीरे-धीरे खत्म होने की दिशा में बढ़ रहा है. विभाग पहले से ही पैराक्वाट की दोबारा वैज्ञानिक समीक्षा कर रहा है और इस प्रक्रिया को जनवरी 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
पैराक्वाट एक हर्बिसाइड यानी खरपतवारनाशी रसायन है. इसका इस्तेमाल खेतों में फसल के आसपास उगने वाली अनचाही घास और खरपतवार को खत्म करने के लिए किया जाता है.
यह अमेरिका में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाले प्रमुख हर्बिसाइड में शामिल रहा है. लेकिन यह सामान्य घरेलू इस्तेमाल की दवा नहीं है. अमेरिका और कैलिफोर्निया में पैराक्वाट को restricted-use pesticide माना जाता है. इसका मतलब है कि इसे केवल निर्धारित नियमों और प्रशिक्षण के तहत अधिकृत या लाइसेंस प्राप्त लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं. घरों में इस्तेमाल के लिए इसके उत्पाद पंजीकृत नहीं हैं. यानी यह ऐसी दवा नहीं है जिसे कोई आम व्यक्ति बाजार से खरीदकर अपने घर के बगीचे में इस्तेमाल कर सके.
कैलिफोर्निया में पैराक्वाट को लेकर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े संभावित जोखिमों की समीक्षा चल रही है. राज्य के नियामक विभाग ने इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन किए हैं.
कैलिफोर्निया के दस्तावेजों में पैराक्वाट के संपर्क को लेकर कई स्वास्थ्य चिंताओं का मूल्यांकन किया गया है. इनमें थायरॉयड से जुड़े संभावित प्रभावों और प्रजनन एवं विकास से जुड़े जोखिमों जैसे मुद्दे शामिल हैं. इसके अलावा वन्यजीवों और दूसरी प्रजातियों पर संभावित असर को भी देखा जा रहा है.
हालांकि, हर स्वास्थ्य प्रभाव को पैराक्वाट से सीधे होने वाला साबित मानना सही नहीं होगा. अलग-अलग स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर वैज्ञानिक और नियामक संस्थाएं अभी भी समीक्षा कर रही हैं. अमेरिका की EPA भी पैराक्वाट की सुरक्षा का अपना मूल्यांकन कर रही है.
पैराक्वाट की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक इसकी बहुत अधिक विषाक्तता है. इसे निगलना बेहद खतरनाक हो सकता है और गलत तरीके से संपर्क होने पर गंभीर स्वास्थ्य नुकसान हो सकता है.
इसी वजह से इसके इस्तेमाल पर आम कीटनाशकों की तुलना में ज्यादा सख्त नियम हैं. लाइसेंस, प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों जैसी शर्तों का पालन जरूरी होता है.
पैराक्वाट और Parkinson’s disease के बीच संभावित संबंध को लेकर भी वर्षों से वैज्ञानिक बहस चल रही है. कुछ अध्ययनों में पैराक्वाट के संपर्क और Parkinson’s के जोखिम के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन अमेरिकी EPA ने अभी तक इसे कारण-परिणाम के रूप में अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया है. इसलिए इसे सीधे यह कहना कि पैराक्वाट Parkinson’s बीमारी का कारण है, मौजूदा नियामक स्थिति से आगे की बात होगी.
कैलिफोर्निया के Department of Pesticide Regulation यानी DPR ने पैराक्वाट से जुड़े उत्पादों की समीक्षा शुरू की है. इसी दौरान कुछ कंपनियों ने राज्य में अपने उत्पादों का रजिस्ट्रेशन खुद रद्द करना शुरू किया. उदाहरण के लिए, Syngenta ने Gramoxone SL 3.0 का कैलिफोर्निया में रजिस्ट्रेशन 1 अप्रैल 2026 से स्वेच्छा से रद्द कर दिया था. यह उत्पाद पैराक्वाट-डाइक्लोराइड पर आधारित है. हालांकि उस समय कैलिफोर्निया के DPR ने स्पष्ट किया था कि दूसरी कंपनियों के पैराक्वाट उत्पाद इससे प्रभावित नहीं होंगे और उनकी अलग-अलग समीक्षा जारी रहेगी. बाद में बाकी उत्पादों को लेकर भी स्थिति बदली और अब राज्य में पैराक्वाट के इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़े हैं.
नहीं. यह बात समझना जरूरी है. कैलिफोर्निया में नियामकीय प्रक्रिया के तहत पुराने स्टॉक और मौजूदा उत्पादों को लेकर अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं. उदाहरण के तौर पर Syngenta के रद्द किए गए Gramoxone SL 3.0 के मामले में राज्य के नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त डीलरों को मौजूदा स्टॉक को एक निश्चित अवधि तक रखने और बेचने की अनुमति थी. किसानों को तब भी लेबल पर दिए निर्देशों और राज्य व संघीय नियमों का पालन करना जरूरी था.
इसलिए ‘फेज आउट’ का मतलब तुरंत एक दिन में पूरी तरह प्रतिबंध नहीं, बल्कि उपलब्धता और इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने की प्रक्रिया है.
कैलिफोर्निया में पैराक्वाट को लेकर कार्रवाई के पीछे एक महत्वपूर्ण कानून भी है. Assembly Bill 1963 को 2024 में पारित किया गया था. इस कानून के तहत राज्य के Pesticide Regulation विभाग को पैराक्वाट की समीक्षा करनी है और जनवरी 2029 तक इसके इस्तेमाल को लेकर फैसला करना है. समीक्षा के बाद विभाग के पास कई विकल्प हैं- उत्पाद का रजिस्ट्रेशन बनाए रखना, उसे निलंबित करना, रद्द करना या उसके इस्तेमाल पर अतिरिक्त पाबंदियां लगाना.
यानी अभी जो कार्रवाई हो रही है, वह केवल राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि एक लंबी नियामकीय और वैज्ञानिक समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है.
कैलिफोर्निया का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में पैराक्वाट को लेकर बहस तेज है. जून 2026 में Vermont अमेरिका का पहला राज्य बना जिसने पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाया. वहां कानून के तहत प्रतिबंध 1 नवंबर 2026 से लागू होगा, जबकि कुछ फल उत्पादकों को बदलाव के लिए लंबी अवधि दी गई है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी EPA अभी पैराक्वाट की सुरक्षा की समीक्षा कर रही है. इसलिए पूरे अमेरिका में अभी इसकी स्थिति एक जैसी नहीं है.
यानी एक तरफ कुछ राज्य इसके इस्तेमाल को खत्म करने की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ संघीय स्तर पर इसकी वैज्ञानिक समीक्षा अभी जारी है.
पैराक्वाट का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है. कई देशों ने मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को देखते हुए इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है या इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म किया है. हालिया रिपोर्टों के मुताबिक कई दर्जन देशों में पैराक्वाट पर पाबंदी या गंभीर प्रतिबंध लागू हैं. यूरोप और चीन जैसे बड़े कृषि बाजारों में भी इसके इस्तेमाल पर लंबे समय से सख्त रुख रहा है. हालांकि, अमेरिका में इसका इस्तेमाल अभी भी जारी है और किसान इसे खासकर ऐसे खरपतवारों के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं जो दूसरी खरपतवारनाशक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो गए हैं.
पैराक्वाट को हटाने के फैसले का एक दूसरा पहलू किसानों से जुड़ा है. कृषि संगठनों का कहना है कि किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रभावी और सस्ती दवाओं की जरूरत होती है. California Farm Bureau ने पैराक्वाट के उत्पाद रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि इससे किसानों के पास खरपतवार नियंत्रण के विकल्प कम हो सकते हैं और खेती की लागत बढ़ सकती है.
यानी किसानों के सामने सवाल यह है कि अगर पैराक्वाट उपलब्ध नहीं होगा तो उसकी जगह कौन सा विकल्प इस्तेमाल किया जाए? क्या वह उतना ही प्रभावी होगा और उसकी कीमत कितनी होगी? यही वजह है कि नियामक फैसले के साथ वैकल्पिक खरपतवार नियंत्रण के तरीकों पर भी चर्चा जरूरी है.
कैलिफोर्निया की बड़ी कृषि कंपनियों में शामिल The Wonderful Company भी लंबे समय तक पैराक्वाट इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में रही है. कंपनी के एक प्रवक्ता के मुताबिक उसने 2019 के बाद से पैराक्वाट का इस्तेमाल 97 फीसदी से ज्यादा कम कर दिया है और 2026 के अंत तक इसे पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है. कंपनी का कहना है कि पैराक्वाट का इस्तेमाल केवल खरपतवार नियंत्रण के लिए किया गया, फल या पेड़ों पर सीधे इसका छिड़काव नहीं किया गया.
यह उदाहरण बताता है कि कुछ कृषि कंपनियां नियामकीय बदलाव से पहले ही दूसरे विकल्पों की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही हैं.
कैलिफोर्निया का पैराक्वाट से जुड़ा फैसला राज्य की पहली बड़ी pesticide action नहीं है. इससे पहले chlorpyrifos को लेकर भी राज्य ने बड़ा कदम उठाया था. Chlorpyrifos पर मानव स्वास्थ्य, खासकर बच्चों के न्यूरोलॉजिकल विकास को लेकर चिंता जताई गई थी. कैलिफोर्निया ने 2019 में इसके इस्तेमाल को खत्म करने की दिशा में कदम उठाया था. अब पैराक्वाट को लेकर भी राज्य में इसी तरह की बहस सामने आ रही है- क्या कृषि में इस्तेमाल होने वाला रसायन फायदेमंद है, और अगर उसके संभावित स्वास्थ्य या पर्यावरणीय जोखिम हैं तो उनका प्रबंधन कैसे किया जाए?
किसानों के लिए पैराक्वाट का इस्तेमाल खत्म होने का मतलब केवल एक दवा का बंद होना नहीं है. उन्हें खरपतवार नियंत्रण के दूसरे तरीके अपनाने होंगे. इसके लिए दूसरे हर्बिसाइड, फसल चक्र, यांत्रिक तरीके, मल्चिंग और दूसरी कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन हर विकल्प हर फसल और हर क्षेत्र में समान रूप से काम नहीं करता. कुछ विकल्पों में ज्यादा मजदूरी या ज्यादा लागत भी आ सकती है.
इसलिए किसी भी रसायन को हटाने के साथ किसानों को सस्ते, प्रभावी और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है.
भारत में भी खेती में खरपतवारनाशकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल लगातार चर्चा का विषय रहा है. कैलिफोर्निया का फैसला भारतीय किसानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के दूसरे हिस्सों में किसी कृषि रसायन को लेकर लिए गए फैसले भविष्य में इसके इस्तेमाल, उपलब्धता और विकल्पों पर असर डाल सकते हैं.
खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर में खेती में रसायनों के इस्तेमाल को लेकर खाद्य सुरक्षा, किसान की लागत, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है.
हालांकि, किसी दूसरे देश में किसी रसायन पर प्रतिबंध या फेज आउट होने का मतलब यह नहीं है कि वही फैसला भारत में भी तुरंत लागू हो जाएगा. भारत में किसी भी कीटनाशक की अनुमति और प्रतिबंध का फैसला यहां के नियामकीय नियमों, वैज्ञानिक आंकड़ों और जोखिम आकलन के आधार पर होता है.
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