खाद सब्सिडी की समीक्षा करेगी सरकार (सांकेतिक फोटो)खाद सब्सिडी पर बढ़ते खर्च को लेकर बनी चिंता के बीच भारत के लिए राहत के संकेत मिले हैं. केंद्र सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया के दाम नरम पड़ने के बाद 2026-27 के लिए खाद सब्सिडी के अनुमान की दोबारा समीक्षा की जाएगी. पहले हालात ऐसे बन रहे थे कि सब्सिडी खर्च 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है, लेकिन अब कीमतों में आई गिरावट से इस बोझ के कम होने की संभावना बढ़ी है. पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश में उर्वरकों की उपलब्धता आरामदायक स्थिति में है और भारत की फर्टिलाइजर सिक्योरिटी पहले की तरह मजबूत बनी हुई है.
उन्होंने बताया कि मौजूदा अनुमान उस स्थिति को ध्यान में रखकर बनाया गया था कि वैश्विक कीमतों का रुख पहले जैसा बना रहेगा, लेकिन हालिया आयात टेंडर के नतीजों के बाद इन आंकड़ों की फिर समीक्षा की जाएगी. सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने हाल में 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए टेंडर जारी किया था.
इस टेंडर के लिए 60 लाख टन से ज्यादा मात्रा के ऑफर मिले और सबसे कम बोली करीब 445 डॉलर प्रति टन तक पहुंची. यह स्तर अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड के टेंडर के दौरान सामने आए दामों की तुलना में 50 प्रतिशत से ज्यादा कम बताया जा रहा है. इसी बदलाव ने सब्सिडी अनुमान को फिर से देखने की जरूरत पैदा की है.
अधिकारी ने साफ किया कि सब्सिडी में संभावित बदलाव का फैसला तुरंत नहीं होगा. इसके लिए सप्लायर की ओर से ऑफर की अंतिम पुष्टि, आयात की वास्तविक मात्रा और आगे की जरूरतों का आकलन किया जाएगा. ऐसे में यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि अंतिम सब्सिडी खर्च कितना रहेगा.
सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान देश में खाद आपूर्ति को लेकर फिलहाल कोई दबाव नहीं है. कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की जरूरत 383.9 लाख टन आंकी है, जबकि उपलब्ध स्टॉक 197.56 लाख टन बताया गया है. सरकार ने कहा कि घरेलू उत्पादन लगातार जारी है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आयात का विकल्प भी खुला रहेगा.
अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि वैश्विक बाजार में नए देशों के बड़े स्तर पर निर्यात शुरू करने से सप्लाई बढ़ी है और इसी वजह से यूरिया के दाम तेजी से नीचे आए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मजबूत स्टॉक स्थिति और निर्बाध घरेलू उत्पादन ने भी आयातकों को संकेत दिया है कि भारत की अतिरिक्त जरूरत सीमित रह सकती है.
सरकार के मुताबिक, देश का यूरिया उत्पादन 2014-15 के 225 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन तक पहुंच गया है. वहीं, उर्वरकों का कुल घरेलू उत्पादन 2021 के 433.29 लाख टन से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन हो गया. पिछले कैलेंडर वर्ष में देश की करीब 73 प्रतिशत खाद जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरी की गई, जिसे सरकार लंबे समय की खाद सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत मान रही है. (पीटीआई)
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