रागी की खेतीदेश में पिछले तीन साल से सबसे अधिक चर्चा मोटे अनाजों की है. मोटे अनाजों की खेती भी काफी तेजी से बढ़ती जा रही है. ऐसा ही एक मोटा अनाज रागी है, जिसे फिंगर मिलेट या मडुआ के नाम से भी जाना जाता है. यह एक पौष्टिक अनाज है, जिसकी खेती दुनिया के कई देशों में की जाती है. रागी आवश्यक पोषक तत्वों का भंडार है, जो पाचन में सहायता करता है. साथ ही शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है. वहीं, रागी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों को देखते हुए इसकी मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. ऐसे में अगर आप भी इस खरीफ सीजन रागी की खेती करना चाहते हैं और उसकी उन्नत किस्म VL-400 का बीज मंगवाना चाहते हैं तो आप रागी के बीज को ऑनलाइन अपने घर पर मंगवा सकते हैं और खेती कर सकते हैं.
किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा मोटे अनाजों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इसके लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है, जिससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन रागी का बीज बेच रहा है. इस बीज को आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद कर बंपर कमाई कर सकते हैं. साथ ही इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं.
VL-400 रागी की एक खास वैरायटी है. ये रागी की अधिक उपज देने वाली किस्म है. VL-400 को ICAR-VPKAS (विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा) द्वारा विकसित की गई एक बायो-फोर्टिफाइड किस्म है. यह अपनी उच्च पैदावार, जल्दी पकने की क्षमता और रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है. ये किस्म लगभग 98 से 102 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, इसकी औसत उपज लगभग 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.
अगर आप भी इस किस्म की खेती करना चाहते हैं तो इस बीज का 5 किलो का पैकेट आपको फिलहाल 20 फीसदी की छूट के साथ मात्र 400 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा. ऐसे में इस बीज को खरीद कर आप रागी की खेती कर सकते हैं.
रागी की खेती के लिए जून-जुलाई के महीने में तैयारी शुरू हो जाती है. रागी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है. इसकी खेती के लिए भूमि उचित जल निकासी वाली होनी चाहिए क्योंकि जलभराव वाली भूमि में रागी की फसल खराब हो जाती है. इसकी खेती में सामान्य बारिश की जरूरत होती है. दरअसल, रागी के बीजों की रोपाई के लिए ड्रिल विधि को सबसे उपयुक्त माना जाता है. यदि आप छिड़काव विधि द्वारा बीजों की रोपाई करना चाहते है, तो उसके लिए आपको समतल भूमि में बीजों को छिड़कना होगा.
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